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नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

Niti Shataka of Bhartrihari Hindi

महाराज भर्तृहरि द्वारा

स्रोत: Neeti Shataka with Sanskrit Shlokas, Anvaya & Hindi Commentary by Dr. Rakesh Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished194 पृष्ठ

पृष्ठ 7, कुल 194 में से

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दो शब्द

नीतिशतकम् की प्रस्तुत पुस्तक को देखकर यह उत्सुकता स्वाभाविक है कि इतनी व्याख्याएँ होने पर एक और व्याख्या क्यों? इस विषय में मेरा विनम्र निवेदन है कि हमारे विद्यार्थियों की एक जिज्ञासा स्वाभाविक रूप से रहती है कि किसी श्लोक की हिन्दी व्याख्या किस प्रकार की जाए, क्योंकि उपलब्ध नीतिशतकम् की व्याख्याओं से उनकी इस जिज्ञासा की निवृत्ति नहीं होती। इसी बात को ध्यान में रखते हुए यह व्याख्या लिखने का विनम्र प्रयास किया गया है।

यह व्याख्या मेरे पिछले लगभग १५ वर्षों के अध्यापन अनुभव का परिणाम है। इस विषय में मेरा प्रयत्न रहा है कि यह पुस्तक विद्यार्थियों के लिए साक्षात् अध्यापक के समान मार्गदर्शन करे, क्योंकि इसमें अत्यन्त सरल बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया गया है। कठिन और संस्कृतनिष्ठ शब्दों से प्रायः बचने का ही प्रयास रहा है।

मूल श्लोकों के बाद अन्वय, शब्दानुसार हिन्दी अनुवाद देने के बाद विस्तृत हिन्दी व्याख्या दी गई है। व्याख्या में श्लोक में निहित गूढ़तम भावों को भी स्पष्ट करने का प्रयास रहा है। तत्पश्चात् व्याख्यात्मक एवं व्याकरणात्मक टिप्पणियाँ देते हुए श्लोक की सर्वांगीण व्याख्या प्रस्तुत करना ही प्रमुख दृष्टिकोण रहा है।

विशेष के अन्तर्गत श्लोक में निहित गूढ़ रहस्यों, अलंकार, छन्द आदि का उल्लेख किया गया है। छन्दों का यद्यपि बार-बार प्रयोग हुआ है, तथापि छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए छन्दों का लक्षण उसी स्थल पर बार-बार दिया गया है। इसके पीछे भावना रही है कि उन छन्दों के लक्षण बार-बार पढ़ने से हमारे छात्र उन्हें हृदयंगम कर सकें।

व्याकरणात्मक टिप्पणी के अन्तर्गत शब्द निर्माण में धातु, प्रकृति, प्रत्यय, समास-विग्रह, समास का नाम आदि विस्तारपूर्वक दिए गए हैं। इस सबके पीछे एक ही उद्देश्य रहा है कि छात्रों के व्याकरण विषयक ज्ञान में वृद्धि हो। इसी शीर्षक के अन्तर्गत संधि-विच्छेद करके संधि का नाम तथा संधि-सूत्र का भी उल्लेख किया गया है, जिससे छात्रों को संधि के स्वरूप को समझ कर श्लोक के अर्थ को समझने में भी सहायता प्राप्त हो।

नीतिशतकम् की सभी उपलब्ध प्रतियों में श्लोकों का क्रम एक जैसा नहीं है। साथ ही कुछ श्लोक ऐसे भी हैं जो कुछ प्रतियों में नहीं मिलते हैं। हमने इन सभी श्लोकों का विषयवार संग्रह करके विद्यार्थियों के हित को देखते हुए सभी की व्याख्या प्रस्तुत की है।