न्याय दर्शन (वात्स्यायन भाष्य सहित)
Nyaya Darshan with Vatsyayana Bhashya
महर्षि गौतम / महर्षि वात्स्यायन द्वारा
स्रोत: बौद्ध भारती वाराणसी · बौद्ध भारती वाराणसी · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३१. सू० ] सर्वानित्यत्वनिराकरणप्रकरणम् २८७ नामाकाशकालदिगात्ममनसां तद्गुणानां च केषाञ्चित्सामान्यविशेषसमवायानां चोत्पत्तिविनाशधर्मकत्वं प्रमाणत उलभ्यते; तस्मान्नित्यान्येतानीति ॥ २८ ॥ सर्वंनित्यत्वनिराकरणप्रकरणम् [ २९-३३ ] अयमन्य एकान्तः— सर्वं नित्यम्; पञ्चभूतनित्यत्वात् ? ॥ २९ ॥ भूतमात्रमिदं सर्वम्, तानि च नित्यानि भूतोच्छेदानुपपत्तेरिति ? ॥ २९ ॥ न; उत्पत्तिविनाशकारणोपलब्धेः ॥ ३० ॥ उत्पत्तिकारणं चोपलभ्यते विनाशकारणं च, तत् सर्वंनित्यत्वे व्याहन्यते इति ॥ ३० ॥ तल्लक्षणावरोधादप्रतिषेधः ? ॥ ३१ ॥ यस्योत्पत्तिविनाशकारणमुपलभ्यते इति मन्यसे, न तद् भूतलक्षणहीनमर्था- न्तरं गृह्यते, भूतलक्षणावरोधाद् भूतमात्रमिदमित्ययुक्तोऽयं प्रतिषेध इति ? ॥३१॥ न; उत्पत्तितत्कारणोपलब्धेः ॥ ३२ ॥ कारणसमानगुणस्योत्पत्तिः कारणं चोपलभ्यते । न चैतदुभयं नित्यविषयम्, इसी तरह सामान्य, विशेष तथा समवाय की विनाशशीलता नहीं देखी जाती—इसलिये ये सब नित्य हैं ॥ २८ ॥ कुछ दार्शनिकों का यह एक दूसरा पक्ष है— पञ्चभूतों के नित्य होने से सब पदार्थ नित्य हैं ? ॥ २९ ॥ यह सब कुछ दृश्यमान जगत् पञ्चभूतात्मक है, वे सभी भूत नित्य हैं, भूतों का उच्छेद आप ( नैयायिक ) मानते नहीं, अतः भूतात्मक गोघटादि सभी द्रव्य नित्य हैं ? ॥ २९ ॥ इनके उत्पत्तिविनाशकारण उपलब्ध होने से सब भूत नित्य नहीं हैं ॥ ३० ॥ इन द्रव्यों की उत्पत्ति तथा विनाश के कारण प्रमाण से उपलब्ध हैं, यह बात सब भूतों के नित्य मानने पर, उपपन्न नहीं होगी ॥ ३० ॥ वे भूतलक्षणाक्रान्त हैं, अतः भूतों की नित्यता का प्रतिषेध नहीं बनेगा ? ॥ ३१ ॥ जब आप यह मानते हैं कि भूतों के उत्पत्ति-विनाशकारण उपलब्ध होते हैं तो वे पदार्थ भूतलक्षणों से हीन कोई अन्य चीज थोड़े होंगे ! अतः भूतलक्षणाक्रान्त होने से यह समग्र जगत् भूतोत्पन्न है, तथा भूत नित्य हैं, अतः इन द्रव्यों का नित्यत्वप्रतिषेध अयुक्त है ? ॥ ३१ ॥ उन गोघटादि द्रव्यों की उत्पत्ति या उत्पत्तिकारण उपलब्ध होने से वे नित्य नहीं हैं ॥ ३२ ॥ जो जो गोघटादि द्रव्य उत्पन्न होते हैं, वे सब अपने अपने कारण गुण वाले उपलब्ध