न्याय दर्शन (वात्स्यायन भाष्य सहित)
Nyaya Darshan with Vatsyayana Bhashya
महर्षि गौतम / महर्षि वात्स्यायन द्वारा
स्रोत: बौद्ध भारती वाराणसी · बौद्ध भारती वाराणसी · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१६. सू० ] अवयविप्रकरणम् ३२५ नातीन्द्रियाश्रयः। भवति हि-'इदमनेन संयुक्तम्' इति, तस्मादयुक्तमेतदिति। गृह्यमाणस्य चेन्द्रियेण विषयस्याऽऽवरणाद्यनुपलब्धिकारणमुपलभ्यते। तस्मा- न्नेन्द्रियदौर्बल्यादनुपलब्धिरणूनाम्, यथा-नेन्द्रियदौर्बल्याच्चक्षुषाऽनुपलब्धि- र्गन्धादीनामिति ॥ १४ ॥ अवयवावयविप्रसङ्गश्चैवमाप्रलयात् ॥ १५ ॥ यः खल्ववयविनोऽवयवेषु वृत्तिप्रतिषेधादभावः, सोऽयमवयवस्यावयवेषु प्रसज्यमानः सर्वप्रलयाय वा कल्पेत, निरवयवाद्वा परमाणूतो निवर्त्तेत, उभयथा चोपलब्धिविषयस्याभावः, तदभावादुपलब्ध्यभावः। उपलब्ध्याश्रयश्चायं वृत्ति- प्रतिषेधः। स आश्रयं व्याघ्नन्नात्मघाताय कल्पत इति ॥ १५ ॥ अथापि— न प्रलयोऽणुसद्भावात् ॥ १६ ॥ अवयवविभागमाश्रित्य वृत्तिप्रतिषेधादभावः प्रसज्यमानो निरवयवात् पर- संयोग को, वह संयोग इन्द्रियगोचर द्रव्यों का हो तो गृहीत हो सकता है, परन्तु अती- न्द्रियों का नहीं गृहीत होता ! जैसे कि लोक में कहा जाता है 'यह इससे संयुक्त है', यहाँ संयोग और संयुज्यमान दोनों इन्द्रियविषय है। आवरणादिक भी इन्द्रिय से गृह्यमाण विषय की अनुपलब्धि के ही कारण कहलाते हैं; अतीन्द्रिय की अनुपलब्धि के नहीं। अतः परमाणुओं की अनुपलब्धि इन्द्रियदौर्बल्य के कारण नहीं, अपितु उनकी अतीन्द्रियता के कारण है। जैसे चक्षु से गन्ध की अनुपलब्धि उसके दौर्बल्य के कारण नहीं, अपितु उसके अविषय के कारण है ॥ १४ ॥ (पृथक् अवयवी न मानने से) अवयवों के भी अवयवी प्रसक्त होंगे, यों सर्वप्रलय (अभाव) हो जायेगा ॥ १५ ॥ यह जो आप अवयवों में न रहने से अवयवी का प्रतिषेध करते हैं, यह प्रतिषेध फिर अवयवों के अवयव में भी होने लगेगा, तब आश्रयव्याघात से वह सब कुछ रहेगा ही नहीं, अर्थात् यह प्रतिषेध उसे प्रलय (अभाव) की तरफ ढकेल देगा। यदि निरवयव होने से उक्त प्रतिषेध परमाणु से निवृत्त होगा तो भी दोनों ही पक्ष में उपलब्धि-विषय कोई रहेगा नहीं, उसके न रहने से उपलब्धि कहाँ से होंगी ! जो उपलब्धि का आश्रय (अवयवी) है, उसको आप मान नहीं रहे हैं। इस तरह आश्रय का विरोध करके आप अपने ही पक्ष से अपने पक्ष का खण्डन कर रहे हैं ! ॥ १५ ॥ [तुष्यतुदुर्जनन्याय से हमने कह दिया था कि प्रलय (सर्वाभाव) हो जायेगा, वस्तुतः सर्वाभाव है नहीं; क्योंकि परमाणु अविनाशी है। वही प्रसङ्ग उठा रहे हैं—] अणु के रहने से प्रलय नहीं होगा ॥ १६ ॥ अवयवविभाग मानने पर, वृत्ति का प्रतिषेध होने से प्रलय (अभाव) प्रसक्त होगा।