भारतकोश
न्याय दर्शन (वात्स्यायन भाष्य सहित)

न्याय दर्शन (वात्स्यायन भाष्य सहित)

Nyaya Darshan with Vatsyayana Bhashya

महर्षि गौतम / महर्षि वात्स्यायन द्वारा

स्रोत: बौद्ध भारती वाराणसी · बौद्ध भारती वाराणसी · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished410 पृष्ठ

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प्रकाशकीय ( द्वितीय संस्करण )

न्यायदर्शन के प्रथम संस्करण का विद्वानों ने इतना आदर किया—इसका हमें अपार हर्ष है । इसीसे उत्साहित होकर आज हम इस ग्रन्थ का द्वितीय परिवर्द्धित एवं संशोधित संस्करण प्रकाशित कर रहे हैं । यह ग्रन्थ बौद्धदर्शन के पूर्वपक्ष के रूप में प्रथम कोटि में आता है । आचार्य दिङ्नाग, आचार्य धर्मकीर्ति तथा आचार्य शान्तरक्षित आदि सभी बौद्ध विद्वानों ने इसी ग्रन्थ को आधार मानकर न्यायमत का खण्डन-मण्डन किया है । विशेषतः आचार्य धर्मकीर्ति ने तो इस ग्रन्थ के पञ्चम अध्याय द्वितीय आह्निक पर अपने वादन्याय प्रकरणग्रन्थ में अक्षरशः विचार किया है । अतः हमारी यह धारणा उचित ही है कि यह ग्रन्थ बौद्धभारती से प्रकाशित होकर बौद्धदर्शन के अध्ययन-अध्यापन में भी पूर्ण सहायक होगा । साथ ही हमारी योजना यह भी है कि बौद्धभारती से अन्य दर्शनों के सूत्र-ग्रन्थों का भी प्रामाणिक हिन्दी रूपान्तर प्रस्तुत किया जाय, ताकि बौद्धदर्शन के अध्ययन की सुदृढ परम्परा पुनरुज्जीवित हो सके । इस योजना में विद्वानों का सहयोग अपेक्षित है ।

बुद्धपूर्णिमा, २०३३ वि० } प्रकाशक वाराणसी