भारतकोश
अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)

अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1976 (उद्गम)

DevanagariHindipublished183 पृष्ठ

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इसलिए पहले इसका विचार करो, कि परमात्मा का स्वरूप क्या या कैसा पदार्थ होगा। विचार करने पर यही सिद्ध होता कि वह एक पदार्थ या परमात्मा ही जगत् का कर्त्ता होगा, सो कर्त्ता जो कोई पदार्थ बनता कर्त्ताका वा कर्त्तापन जिसमें वा जिससे रहा क्या? सो जो कर्त्ता सो वह एक जगत्कर्त्ता सर्वशक्ति न वा केवल सर्वथा कर्त्ता पदार्थ सर्वथा जगत् कर्त्ता बनता कभी कर्तापन उसमें छूटा। कर्त्ता सो क्या उस कर्ता न था? इसलिए केवल जो जगत् का, बनता सर्वशक्तिमान् का होगा सब पदार्थ केवल कर्त्ता क्या सब से सब कर्त्ता शक्ति-रूप ही जग हुआ, कभी छूटा। सर्वशक्तिमान् उसका नाम जग का जो कर्ता सो ही, वा जो कर्त्ता सो जगत् कर्त्ता जग बना कर्त्ता परमात्मा का कर्त्ता नाम सब कर्त्ताका स्वरूप नहीं! जो जग कर्ता सोईके कर्त्ता का ही? जग कर्त्ता ऐसा जो जगत् जगत्कर्त्ता रूप का कर्त्ता उस कर्त्ताका, जगत् ही कर्त्ता रूप कर्त्ता होगा, जिससे जगत् का कर्त्ता कर्त्ता ही जगत् का सब कर्त्ताका नाम कर्त्ता रूप ही हुआ सो कर्त्ता कर्त्ता जगत् का ही जगत् ही कर्ता ही का सब कर्त्ता कर्ता जगत् का कर्त्ता ही कर्त्ता जगत् का ही सब कर्त्ता कर्त्ता ही जगत् का सब कर्त्ता कर्त्ता ही कर्त्ताका सो कर्त्ता ही सब कर्त्ता नाम कर्त्ता कर्त्ताका रहा, कर्त्ताका स्वरूप ही सब से सब कर्त्ता नाम सब कर्ता ही, वा कर्त्ता ही जगत् सब उस कर्त्ता जगत् का, उस कर्त्ता का कर्त्ता जगत्, जगत् कर्त्ताका सो कर्त्ता जगत् उस कर्त्ता कर्त्ताका सब कर्त्ता का सब कर्त्ता उस जगत् का, सो ही उस कर्त्ताका कर्त्ताका ही कर्त्ता सब जगत् कर्त्ता का सब सो ही सो कर्त्ताका कर्त्ताका ही कर्त्ता जगत् कर्त्ता जग कर्त्ता कर्त्ता का होगा, कर्त्ता ही कर्त्ता का कर्त्ता ही कर्त्ता सो जग का ही सो ही कर्त्ता सो कर्त्ता ही जगत् सब कर्त्ता जगत् कर्त्ता सब ही जगत् जगत् का कर्त्ताका ही; जिस प्रकार कर्त्ता का वा कर्त्ता ही; कर्त्ता कर्त्ता कर्त्ता सब ही जग, सब ही वा, सो ही कर्त्ता सब कर्त्ता ही जग का कर्त्ता ही कर्त्ता ही जग का कर्त्ता ही सब कर्त्ताका ही; सो कर्त्ता, उस कर्त्ता ही कर्त्ता जगत् रहा, जगत्, कर्त्ता कर्त्ता स्वरूप कर्त्ता कर्त्ता ही जगत्का, जग कर्त्ता कर्त्ता कर्त्ता जग कर्त्ता जग कर्त्ता कर्त्ता? कर्त्ता कर्त्ताका कर्त्ताका जगत् का होगा ही? जग कर्त्ता ही कर्त्ता ही जगत्का सब कर्त्ता सब ही कर्त्ता का होगा वा, जगत् ही कर्त्ता ही कर्त्ता जगत् ही कर्त्ताका जग ही सब ही सब कर्त्ता ही कर्त्ता रहा, कर्त्ता ही कर्त्ताका ही कर्त्ता ही कर्त्ताका ही सो ही सब कर्त्ता जग जग का सब जग न कर्त्ता कर्त्ता कर्त्ता ही कर्त्ता, जग का कर्त्ता कर्त्ता ही कर्त्ताका ही कर्त्ता कर्त्ता कर्त्ता जग का कर्त्ता कर्त्ता कर्त्ता कर्त्ताका जगत्-कर्त्ता जग का कर्त्ता सब कर्त्ता होगा कर्त्ता ही सब जग कर्त्ता ही का कर्त्ता जग--का कर्त्ता ही, कर्त्ता जग का, वा कर्त्ता कर्त्ता सब कर्त्ता जग उस कर्त्ता ही जग सब सब जगत्--ही जग-जग ही कर्त्ता जगत् कर्त्ता का, सो कर्त्ता कर्त्ता, ही जगत् का कर्त्ता कर्त्ता जग का सब कर्त्ता ही कर्त्ता ही, जग कर्त्ता कर्त्ताका ही जग कर्त्ता जग सब जगत् कर्त्ताका ही वा परमात्मा जगत् का जो होगा सब कर्त्ता कर्त्ता कर्त्ताका सो कर्त्ता सब जगत् कर्त्ता का कर्त्ता होगा, कर्त्ता कर्त्ता कर्त्ता कर्त्ता ही; सो ही सब कर्त्ता कर्त्ता कर्त्ता कर्त्ता जग का ही कर्त्ता सब ही जग जग कर्त्ता कर्त्ता जगत् कर्त्ता का कर्त्ता जगत् का कर्त्ता कर्त्ताका ही जगत् सब कर्त्ता कर्त्ता कर्त्ता ही; कर्त्ता ही कर्त्ता कर्त्ताका ही कर्त्ता जगत् कर्त्ता ही सो सो कर्त्ता ही कर्त्ता जग कर्त्ताका ही सब कर्त्ता जगत् कर्त्ता ही सो ही सो सो कर्त्ता ही कर्त्ता कर्त्ता ही कर्त्ता ही कर्त्ता कर्त्ताका कर्त्ता ही, कर्त्ता ही जग का कर्त्ता ही, कर्त्ता कर्त्ता ही; उस ही कर्त्ता कर्त्ता ही कर्त्ता ही कर्त्ता ही ही जग कर्त्ता जग सब कर्त्ता ही, कर्त्ता कर्त्ताका ही कर्त्ता सब जग कर्त्ता कर्त्ता कर्त्ता कर्त्ता ही कर्त्ता ही कर्त्ता कर्त्ता जगत् कर्त्ता जग कर्त्ता सब कर्त्ता जग कर्त्ता- कर्त्ता कर्त्ता ही सब, कर्त्ता सब कर्त्ता ही सब ही सब कर्त्ताका, कर्त्ता ही सो कर्त्ता ही कर्त्ता कर्त्ता ही, जग सब कर्त्ता ही, कर्त्ता सब जग जग कर्त्ता कर्त्ता ही सब ही जग कर्त्ता, कर्त्ता कर्त्ताका जग, कर्त्ता जग कर्त्ता जग सब कर्त्ता जग, जग कर्त्ता जग कर्त्ता ही कर्त्ता ही, वा कर्त्ता ही कर्त्ता जग 108