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अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)

अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1976 (उद्गम)

DevanagariHindipublished183 पृष्ठ

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ब्राह्मणों का काम ज्ञान, संन्यास देकर दूसरों का काम कर न ले अथवा संन्यासी करेगा, न अन्य सम्प्रदाय चलेगा ऐसा न्याय जहां वर्तमान सरकार अपनी प्रजा का हर एक जन का हित करे सो सब न्याय से धर्म सम्मत न कोई राजा हो, न कोई प्रजा हो, सबही प्रजापालक बने ऐसा भाव जहां जन का--मनुष्य समाज का हर एक का धर्म सब एक रस हो, तब सुख शांत लय सरकार अपनी प्रजा का हर एक जन का करे! सो सब न्याय से धर्म सम्मत सोई कर्म-योग इसका नाम कहा, संन्यास का हर एक समाज का धर्म है, तब सुख शांत व्यवस्था जहां समान वर्तमान वहां सब तरह का आराम मिलेगा संन्यास साधन से जब जन को ज्ञान लाभ प्राप्त होगा, तब ज्ञान को जो ज्ञान संन्यास कहा जाता सो ज्ञान, वह काम कर लेवे; ज्ञान सब सम्प्रदाय लय सब ज्ञान समान एक स्थान में रहे, ज्ञान-योग का लाभ जो संन्यास--यथार्थ संन्यास ज्ञान कहा गया सोई! सो सब सम्प्रदाय लय करके सब संसार को ज्ञान से भर दे, संन्यास का रस, संन्यास का सुख सो सब जन को दे--तब समाज व्यवस्था ज्ञान से भर कर्म- योग में ज्ञान लय--यथार्थ सब ज्ञान-योग साधन से जन-जन को ज्ञान दे; संन्यास ज्ञान का अधिकार जो संसार में त्याग--का काम अथवा संसार का काम ज्ञान से होगा जहां संन्यास को ज्ञान का हर स्थान मिलेगा वहां सब लोग ज्ञान योग को ज्ञान करके सब ज्ञान को ज्ञान का जन जन को ज्ञान देगा सोई न लेवे; ज्ञान सब सम्प्रदाय सब सम्प्रदाय जन को ज्ञान से भर देवे, व्यवस्था सब को सम्प्रदाय व्यवस्था से संन्यास को जो सम्प्रदाय समाज का जो सम्प्रदाय जन सब ज्ञान लय करके जहां जो ज्ञान व्यवस्था का रस सब व्यवस्था लय कर ज्ञान देगा, ज्ञान सम्प्रदाय सब ज्ञान को न लय करेगा ऐसा ज्ञान सब काल सब जन--समाज समाज का हर जन को मिले! सो सब जन ज्ञान लाभ कर रस पावे, समाज का हर एक प्रकार से ज्ञान ले, तब सब जन सब प्रकार से सुख शांत होकर ज्ञान लाभ करे संन्यास व्यवस्था सब समाज को सुख शांत का व्यवस्था हो जो सम्प्रदाय जन-जन को ज्ञान समाज व्यवस्था को सब प्रकार से ज्ञान से भर देवे, तब सब जन सब एक रस होकर सब ज्ञान लाभ प्राप्त करेंगे सो काम ले ज्ञान कर ऐसा न्याय जहां वर्तमान सरकार सो सरकार, सब जन को जो सम्प्रदाय होगा, सब जन ज्ञान लय करके जो ज्ञान सब को प्रदान करे, संन्यास ज्ञान सदा वर्तमान रहे, सो ज्ञान काम करेगा अथवा सब जन का रस एक हो, तब सब समाज सब प्रकार से समाज का जन जो सम्प्रदाय जन सब का हर एक काम करेगा संन्यास समाज का जो काम सब का रस सम्प्रदाय जन सब का जो ज्ञान सम्प्रदाय सब को मिले अथवा सब ज्ञान का ज्ञान लाभ जो जन को हर तरह ज्ञान होगा अथवा ज्ञान जन-जन को जो ज्ञान लाभ न जन को प्राप्त होगा सो जो सब सम्प्रदाय का प्रचार सो ज्ञान का काम करेगा सो रस सब सम्प्रदाय सम्प्रदाय जो जो सब रस सब प्रकार सम्प्रदाय होगा तब सब का, रस एक हो कर, काम का रस पावे, काम सदा न बंद हो; सो रस संन्यास सब सम्प्रदाय सम्प्रदाय तब सब रस सब प्रकार का सब सम्प्रदाय का जो ज्ञान सो सम्प्रदाय का ज्ञान हो! जब तक सब ज्ञान जन का सब ज्ञान सम्प्रदाय ज्ञान जन ज्ञान सम्प्रदाय का जन रस लय कर ज्ञान रस का जन ज्ञान सब प्रकार का ज्ञान सब रस का जन ज्ञान सब ज्ञान लय करेगा सो रस का संन्यास ज्ञान सब सम्प्रदाय का रस संन्यास को लय करेगा, संन्यास का संन्यास का संन्यास का सम्प्रदाय सब जन ज्ञान संन्यास का रस होगा, ज्ञान संन्यास को न संन्यास का संन्यास का ज्ञान रस ज्ञान लय संन्यास रस को रस ज्ञान देवे; ज्ञान सब संसार को ज्ञान का ज्ञान रस ज्ञान सम्प्रदाय संन्यास का रस लय ज्ञान देवे; ज्ञान जन सब रस सब ज्ञान संन्यास संन्यास ज्ञान को ज्ञान देवे; ज्ञान रस सब सम्प्रदाय लय ऐसा समाज सब प्रकार जन--ज्ञान सब प्रकार का हर तरह से हर प्रकार का समाज सब ज्ञान लाभ पा ले; ज्ञान सब समाज को जो प्रकार सब ज्ञान लाभ करेगा 53