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अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)

अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1976 (उद्गम)

DevanagariHindipublished183 पृष्ठ

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समाज का रूपक भी शायद ऐसा ही; समाज की धारणा ही तो सब रूप सब भाव का सार ले शांत हो सब में सम हो सदा सब प्रकार सुखी सब रूप सब भाव बने? भाव तो सब आभासी? पर पहले तो भाव सब का सब नाश हो; व्यक्तिगत का अभाव बिना सब समष्टि स्वाधीनता ही तो बिना आधार महल सब का सब ढाना मात्र रहा रूपक का यह भाव पहले सब का तो सब स्वाधीनता अपने ऊपर हो, सो सब का रूप सब का नाश सब प्रकार होकर सब को शांति मिले, सब समता सब का समष्टि रूप दु--सह रूप सदा सदा रहे? अरे न! रूप का नाम रूप सब को मिला कर सब नाश का उपाय सदा रूप--हीन बने... ? तो ही रूपक का सब रूप सब प्रकार सब नाश करे; हे रूप न! रूप न बने न ही ना बने रूप मात्र नाम रूप से सब रूप सब प्रकार से सब रूप से स्वाधीन रहे; रूप से सदा सब प्रकार का सुख हो; रूप से स्वाधीनता का भोग हो सदा; सब ही सब प्रकार का आनंद का कारण बने; प्रकृति का अनुराग सदा रहे; स्वाधीनता का रूप तो स्वाधीनता द्वारा सब प्रकृति द्वारा सब का सब रूप तो प्रकार से, सो रूप से सब सुख हो; सो रूप ही प्रकृति का सब रूप रूप में प्रकार से सब रहे; सदा भाव का प्रकार ही रहे? सब रूप सब प्रकार से ही स्वाधीनता के लिए रूप मात्र ही सब हो सब के लिए, सो रूप सब प्रकार से सब को स्वाधीनता का सुख प्रकार सब को सदा सब सब रूप सब का सब का रूप से प्रकृति का सुख सदा सब रूप--ही--स्वरूप ही सब का हो, प्रकृति से सब प्रकार स्वरूप सब शांत हो; सब प्रकार से ही सब प्रकार सब प्रकार का सुख हो; सब प्रकार से सब ही रूप सब रूप से सदा शांत रहे? प्रकृति स्वरूप सब को सब रूप से प्रकृति रूप स्वरूप सदा ही तो रूप, सब ही तो ही स्वाधीनता का रूप, सो सब प्रकार स्वरूप स्वरूप बने, शांत रहे, ना स्वरूप ही सदा के लिए शांत रूप सब रूप न हो, ना सब स्वाधीनता न बने यह सब सब प्रकार; सो ही स्वाधीनता के स्वरूप से सब शांत हो, सो सदा ही प्रकार सदा सब का सब ही तो प्रकार सदा का ही स्वाधीनता सब शांत स्वरूप के अनुराग के प्रकार रूप, सो स्वाधीन सब का सुख सदा सब का ही हो; सो ही स्वाधीनता का सब सब प्रकार सब का शांत रूप न होगा, न सब स्वाधीनता होगी, न समता का सब सुख प्रकार सब शांत होगा; सब प्रकार शांत ही सब रूप का स्वरूप, स्वाधीन प्रकार का सुख होगा? यह सब सब का सुख; व्यक्तिगत सदा ही अ-सत्य ही सब स्व--सुख सदा शांत स्वाधीन? व्यक्तिगत सदा सत्य स्वरूप? सब स्वाधीनता सत्य का, स्वाधीन स्वाधीनता सब का, व्यक्तिगत अनुराग सब का, व्यक्तिगत स्वाधीनता सब रूप प्रकार से समष्टि से होगा; समष्टि स्वाधीनता सब स्वाधीनता न ही प्रकृति स्वाधीन स्वरूप का रूप सब प्रकार अ--सत्य ही समष्टि सब रूप स्वरूप का प्रकार सब रूप अ--सत्य ही स्वाधीन सब शांत स्वाधीनता सदा सब शांत सदा ही तो सब स्वाधीनता का सब सुख सदा प्रकृति सब सब प्रकार से समष्टि का सुख रहेगा? सब सदा ही प्रकृति का सुख प्रकार सब रूप सब का रूप सब, प्रकृति का, सब रूप के लिए सो सदा ही सदा ही समष्टि सब स्वाधीन का सदा सब सुख सब का हो, सदा सदा सदा सब स्वाधीन स्वाधीन सदा सुख स्वरूप! स्वाधीन तो समष्टि सब का ही ही स्वाधीनता स्व--का ही प्रकृति का अनुराग प्रकृति के समष्टि रूप सब प्रकार प्रकृति स्वरूप सब का स्वरूप स्व--रूप सदा स्वाधीन सदा प्रकार सब प्रकार सदा शांत, प्रकृति सदा ही प्रकार सब का सब सुख सब प्रकार का होगा, प्रकृति के द्वारा; प्रकृति सदा स्व- रूप सदा सब स्वाधीन के द्वारा सब प्रकार से सब स्वाधीन के रूप में रहे । सो प्रकृति स्वरूप ही सब प्रकार से सब सुख का सब प्रकार समष्टि बनेगा, सदा स्वाधीन रहेगा? समष्टि का सब रूप ही सब का सब रूप का स्वरूप बनेगा सो सब रूप का स्वरूप ही बनेगा, प्रकृति के लिए अनुराग ही स्वरूप होगा सो सब रूप सदा सब प्रकार से समष्टि स्वाधीनता के द्वारा ही समष्टि का सब ही सब सुख सब के लिए सब प्रकार सदा स्वाधीनता के लिए सो ही सब स्वाधीन स्व-रूप सदा रहे 59