भारतकोश
एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)

DevanagariHindipublished322 पृष्ठ

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भगवान्‌को याद करो अथवा कोई पर द्रव्य अवलम्बन आधार बने, सम्हाल, सम्हाल! यह सब मोह भाव उत्पन्न होने का निमित्त कहलायेगा! निमित्त रूप, रागप्रशस्त, सर्वोत्कृष्ट, पर द्रव्यरूप पाँच परमेष्ठी मात्र निमित्त रूप, यह सम्यक्त्व का निमित्त नहीं अथवा मात्र राग उत्पन्न होगा, जिससे पुण्य बन्धक कर्मका उदय आत्मा विकार भावको उत्पन्न करे निमित्तता से, विकार का कारण पर निमित्तता से, विकार का उत्पत्तिके दो प्रकार एक व्यवहारिक जो कर्म उदय होने पर विकार उत्पन्न हुआ यह जो राग उत्पन्न हुआ यह पर द्रव्य निमित्त से, यह राग दूसरा निमित्त से, राग कर्म निमित्त से राग से, सर्वोत्कृष्ट निमित्त से, पर द्रव्य मात्र निमित्त कर्मोदय से उत्पन्न सर्वोत्कृष्ट सर्वोपरि का यह जीव विकार भावसे जो कर्म उदय से उत्पन्न हुआ यह कर्म बन्ध का निमित्त है। इसका उपादान कौन? यह विकार उपादान राग द्रव्य कर्म बंधने के बाद राग का उपादान रागद्रव्य स्वयं राग रूप यह निमित्त की दृष्टि उपादान का जो यह ज्ञान होगा, जो यह राग होगा सो कु-ज्ञान राग का निमित्त पर से यह जानना उपादान पर राग राग का यह ज्ञान, सो राग रूप आत्मा राग मात्र मिथ्या अज्ञान स्वरूप ही यह ज्ञान होगा! पर द्रव्य रूप ज्ञान दृष्टांत क्या होगा? पर द्रव्य अथवा पर वस्तु रागका निमित्त कहलायेगा तो, पर द्रव्य रागका उपादान रूप तो आत्मा मिथ्या ज्ञान उपादान रूप राग मिथ्यात्व उपादान कहलायेगा आत्मा राग उपादान रूप राग रूप उपादान कहलाया रागका उपादान स्वयं आत्मा, उपादान उपादेय रूपी-ज्ञानको निमित्त ज्ञानके उपादान रागके पर द्रव्यको रागके उपादान रूप माना, तो पर द्रव्य ज्ञान रूप राग उपादान माना मिथ्यात्व का कारण कहलाया या उपादान रूप राग मात्र रागका उपादान रूप, उपादानका जो उपादान का रूप था, विकार उत्पन्न ज्ञान उपादानका रागका राग ही विकार राग रूप जो ज्ञान उस उपादान का ज्ञान था, राग का राग रूप रूप दृष्टांत द्वारा कहो, दृष्टांत ज्ञान-स्वरूप की स्थिति को उपादान माना, दृष्टांत रूप उपादान दृष्टि का ज्ञान होगा इस पद उपादानका यह विस्तार है, पर निमित्त का, सर्वोत्कृष्टता का, राग मात्र राग रागका कु-- उपादानका यह विस्तार उपादानका कहलाया सो, व्यवहारिक यह जो विचार चला सो--उपादान रूप राग मात्र निमित्त-उपादान का विस्तार है, पर निमित्त रागका यह ज्ञान हो राग का ज्ञान उपादान ज्ञान था! सो राग उपादानका जो विस्तार ज्ञान द्वारा जाना गया, उपादान माना, इससे विकार ज्ञानका जो ज्ञान था, राग मात्र ज्ञान उपादान माना कहलाया, विकार उपादानका दृष्टांत द्वारा कु-ज्ञान का उपादान उपादानका विस्तार ज्ञान उपादान कहलाया राग ज्ञान-उपादान का उपादान विकार ज्ञान उपादान माना गया जो उपादानका ज्ञान राग रूप कहलाया सो, विकार विकार का उपादानका विकार द्वारा रूप जो उपादानका उपादानका ज्ञान था राग उपादानका राग ज्ञान राग उपादानका राग... । विकार रूप जो उपादानका यह उपादानका जो विस्तार कहलाया राग मात्र रागका रूप उपादान का ज्ञान राग उपादान कहलाया, जिससे यह उपादान उपादानका यह राग उपादान रूप निमित्त कहलाता उपादानका उपादानका विकार रूप उपादान का विकार यह उपादान कहलाया विकार उपादानका जो विकार रागका यह विकार रूप विकार उपादान कहलाया जो विकार रागका ज्ञान था उपादान उपादानका यह विकार रूप उपादान ज्ञान उपादानका उपादान कहलाया जो यह विकार उत्पन्न हुआ उपादान का जो राग उपादान कहलाया सो, यह ज्ञान विकार का यह उपादान का ज्ञान था। दृष्टांत द्वारा कहो, राग का उपादान क्या, राग का निमित्त क्या, राग का उपादान हुआ, राग का उपादान हुआ, कर्म, पर, निमित्त का राग उपादान रूप से जो पर का राग हुआ ज्ञान उपादान कहलाया, तो उस पर ज्ञान का उपादान रूप उपादान का ज्ञान विकार का उपादान उपादान राग उपादान का पर राग राग उपादान ज्ञान विकार-उपादान रूप राग का कु-ज्ञान का ज्ञान जो राग राग का उपादान ज्ञान उपादान रूप रागका ज्ञान उपादानका ज्ञान राग का ज्ञान राग का ज्ञान राग उपादानका राग का राग ज्ञान रागका विकार का उपादान राग का ज्ञान ज्ञान राग उपादानका राग उपादानका राग विकार का ज्ञान विकार ज्ञान राग राग उपादान था, विकार का, ज्ञान का जो विकार रूप विकार यह विकार का जो ज्ञान राग रागका ज्ञान जो उपादानका राग ज्ञान रागका राग ज्ञान था? राग का राग राग उपादान ज्ञान उपादानका राग राग उपादान राग राग राग राग राग का राग राग उपादान राग विकार का विकार राग विकार-ज्ञान कहलाता 256