भारतकोश
एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)

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अथवा किसका सन्देह है? यदि तुम्हारे विचार ज्ञान का विषय नहीं हैं तो यह सब व्यर्थ ही तो नहीं है? यदि इन विचारों तथा इनके विषयभूत पदार्थों का ज्ञान तुम्हारे प्रत्यक्ष द्वारा नहीं माना जाता है, किन्तु इन विचारों का प्रत्यक्ष तो किया गया और इनके विषय को जाना, तो फिर अन्य बाह्य वस्तु का भी ज्ञान क्यों नहीं माना जाता? तुम यह किस प्रकार कहते हो? इसलिये ज्ञान के सब विषय बाह्य ही प्रत्यक्षरूप प्रत्यक्ष प्रतिभासित होते हैं। स्वप्न अवस्था में भी अनुभूत ही वस्तु का इस प्रकार का यह मिथ्या प्रतिभास होता है। अन्यथा जो इस तरह का प्रतिभास होता है वह अज्ञान जन्य प्रतिभास प्रतिभास ही तो है अथवा भ्रमरूप? या फिर यह बात ही मिथ्या? वस्तु के ज्ञान का यह विषय? प्रत्यक्ष दृष्टांत तो इस प्रकार है, जब कि किसी के द्वारा सम्पादित यह ज्ञान प्रत्यक्ष रूप से यह ज्ञान अन्य बाह्य वस्तु के समान ही तो है? ज्ञान इस प्रकार अन्य वस्तु के समान दिखाई दे? इसलिये यह विचार केवल प्रतिभास मात्र ही रूप में सत्य है। इस प्रकार बाह्य वस्तु का ज्ञान रूप में प्रत्यक्ष रूप होने पर भी पदार्थ रूप ज्ञान नहीं हो रहा जिस प्रकार रस्सी में सर्प का ज्ञान अथवा रेत-कण ज्ञान के रूप, तो प्रतिभास मात्र एक पदार्थ मात्र रूप ही तो सब जगत् प्रतिभास रूप ज्ञान के द्वारा ही ज्ञात हो रहा है, रस्सी का ही यह ज्ञान रूप प्रकाश मिथ्या है, रस्सी का न होकर? फिर यह क्या है? ज्ञान बाह्य वस्तु प्रकाशक? प्रतिभास प्रकाश स्वरूप? या प्रतिभास ही ज्ञान प्रकाश? यह रूप किसका है? यह क्या प्रतिभास? ज्ञान प्रकाश जिस प्रकार बाह्य रूप में अन्य प्रकाश के साथ सत्य ही रहता है। रस्सी का ज्ञान बाह्य पदार्थ के साथ ज्ञान होने से यह ज्ञान प्रकाश ही तो होगा फिर, उस रस्सी ज्ञान प्रतिभास से ही ज्ञात हुआ, यह न ज्ञान रूप बाह्य पदार्थ का ज्ञान उस प्रतिभास ज्ञान रूप में न प्रतिभास प्रकाश का रूप प्रतिभास रूपी प्रकाश का प्रत्यक्ष रूप ही तो ज्ञान आ--ना प्रतिभास का प्रकाश ही तो है, रस्सी ज्ञान मात्र ही यह सन्-मात्र रूप ज्ञान ही रूप प्रकाश न रहा, तो यह ज्ञान का ही ज्ञान के सन्दर्भ में सन्--का ज्ञान ही रूप में प्रकाश ही सब जगत् के प्रतिभास मात्र ही रहा है, तो यह ज्ञान बाह्य पदार्थ रूप में ज्ञान बाह्य ज्ञान रूप से भिन्न नहीं, यह ज्ञान प्रकाश ही प्रतिभास इस प्रकार ज्ञान के स्वभाव का ज्ञान बाह्य रूप सब प्रतिभास, मात्र प्रतिभास, मात्र प्रतिभास स्वरूप ही सब रूप जगत् प्रतिभास रूप ज्ञान द्वारा ही ज्ञात हो रहा ज्ञान प्रकाश मात्र ज्ञान के रूप सब जगत् का प्रतिभास मात्र ज्ञान बाह्य ज्ञान प्रत्यक्ष बाह्य ज्ञान के साथ ज्ञान होने से ज्ञान प्रतिभास बाह्य ज्ञान रूप ही सब बाह्य पदार्थ प्रतिभास ही सब रूप सब रूप ज्ञान से भिन्न रूप में प्रतिभास ही सब रूप है, तो सन्-मात्र ज्ञान का ज्ञान प्रतिभास ही सब का बाह्य रूप सब ज्ञान ही प्रत्यक्ष का प्रकाश ही न हुआ! न प्रत्यक्ष ही प्रतिभास, सब ज्ञान ही प्रतिभास ज्ञान प्रतिभास का प्रकाश प्रकाश, प्रतिभास प्रकाश, रूप बाह्य प्रतिभास का प्रतिभास प्रतिभास तो यह प्रत्यक्ष के अभाव स्वरूप का ज्ञान प्रतिभास का प्रत्यक्ष स्वरूप ज्ञान सब जगत् का प्रतिभास मात्र ज्ञान सब जगत् ज्ञान के साथ ही सब रूप इस प्रकार सब ही प्रकाश सब ज्ञान रूप सब ज्ञान सब प्रतिभास का ज्ञान सब ज्ञान ज्ञान रूप सब ही ज्ञान रूप ज्ञान स्वरूप का ही ज्ञान सब प्रकाश रूप सब सब रूप ही ज्ञान के साथ ही सब ज्ञान रूप का प्रतिभास स्वरूप ज्ञान सब ज्ञान सब बाह्य पदार्थ का सब ज्ञान रूप ज्ञान रूप सब ज्ञान, जो प्रतिभास मात्र रूप के साथ बाह्य ज्ञान रूप प्रतिभास, बाह्य पदार्थ रूप ज्ञान प्रकाश रूप, ज्ञान प्रकाश रूप सब ही ज्ञान का प्रत्यक्ष रूप ज्ञान सब ज्ञान सब ज्ञान रूप ही सब ज्ञान रूप ज्ञान का प्रत्यक्ष ज्ञान रूप सब जगत् ज्ञान-मात्र प्रकाश ही सब रूप ज्ञान सब जगत्, बाह्य पदार्थ रूप, तो सब ज्ञान के ही रूप स्वरूप प्रतिभास प्रकाश रूप ही सब सब ज्ञान सब बाह्य पदार्थ सब सब ज्ञान बाह्य रूप सब सब ज्ञान रूप है, ज्ञान रूप ही प्रत्यक्ष प्रतिभास प्रतिभास के ज्ञान स्वरूप सब ही ज्ञान सब रूप सब बाह्य के सब रूप पदार्थ है, बाह्य पदार्थ सब ही ज्ञान बाह्य ज्ञान प्रत्यक्ष ज्ञान सब सब ही ज्ञान सब प्रत्यक्ष रूप सब सब ज्ञान सब ज्ञान सब बाह्य प्रतिभास सब ज्ञान सब ज्ञान सब ज्ञान के सब ही प्रतिभास ज्ञान है? या सब प्रत्यक्ष सब ज्ञान है, ज्ञान बाह्य ज्ञान, सब ज्ञान ज्ञान ज्ञान सब तो सब ही सब सब ज्ञान रूप स्वरूप का प्रतिभास रूप है, प्रतिभास प्रत्यक्ष सब ज्ञान का ही सब ज्ञान का ज्ञान स्वरूप ही सब ज्ञान पदार्थ के प्रत्यक्ष ज्ञान सब बाह्य प्रकाश सब प्रतिभास सब है! ज्ञान सब प्रत्यक्ष-प्रत्यक्ष सब 269