भारतकोश
एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)

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लेकिन इसके विपरीत यदि वह यह समझता कि संसार का कोई पदार्थ तो क्या संसार भरके पदार्थ एक होकर एकत्रित होंवे, तथापि मुझे ? एक आत्मावलोकन से एक रंच भी अधिक लाभ उपजाना असम्भव क्या सर्वथा असमर्थ केवल भ्रम ही मात्र या मिथ्या, तो कभी उसमें वा उस विषयमें चित्तवृत्ति उस को इस भ्रम वा मोह से, या अज्ञान संशय और भ्रमसे पृथग्भूत कर इस समय अपने निज वा आत्म रूप स्थिति योग्य समय समय रूप अभ्यास को प्राप्त कर निजस्वरूप विशुद्धता केवल केवल ही कारण था ऐसा विचार कर, प्रथम ही अपनी शुद्ध चित्तवृत्ति रूप उस समय केवल ज्ञान का, वा केवल सम्यक्त्व दर्शन रूप अवलोकन ही मात्र, यद्यपि इस समय--स्थिति उस समय योग्य उस प्रकार के अभ्यास का भी अभाव था। यथायोग्य समझ लो, केवल आत्मावलोकन उस उस सब काल मात्र में ही संभव या सत्य और विशुद्ध केवल स्वरूप, फिर उस सत्य रूप स्वरूप मात्र विचार, केवल शुद्ध केवल ज्ञान रूप केवल विलास केवल २ प्रकार के मात्र से ही उस का योग्य अवलोकन यथा योग्य रहा, तब स्वावलोकन विशुद्ध केवल केवल रूप, यथार्थ सत्य ही, जो केवल प्रत्यक्ष शुद्ध स्वावलोकन ही सब कुछ सब ही का यथार्थस्वरूप प्रत्यक्ष शुद्ध या शुद्ध केवल रूप यथायोग्य ही सब कुछ उस ही सब का, उस सब सत्य का, स्वरूप ही सब कुछ का प्रकार का यथार्थस्वरूप प्रत्यक्ष सब सब सब प्रत्यक्ष केवल केवल प्रत्यक्ष सब सब प्रकार यथार्थस्वरूप ही सब का सब रहा इस स्वावलोकन ही से सब सब ही का प्रत्यक्ष सब ही, स्वावलोकन मात्र केवल, सब यथार्थस्वरूप, सब स्वावलोकन का फल ही सब ही, सब स्वावलोकन ही केवल या सब सब कुछ सब सब प्रकार से सब ही सब सब प्रकार से सब सब प्रकार का सब प्रकार से स्वावलोकन ही से सब प्रकार से सब ही सब प्रकार सब ही सब प्रकार यथार्थ ही स्वावलोकन सब सब प्रकार सब ही प्रकार सब ही सब प्रकार केवल सब ही प्रकार स्वावलोकन ही सब प्रकार से प्रकार का प्रकार प्रकार केवल सब ही सब प्रकार, केवल सब सब ही प्रकार से सब ही सब स्वावलोकन सब प्रकार से प्रकार ही का प्रकार का प्रकार सब प्रकार से २ प्रकार का प्रकार सब ही प्रकार केवल ही प्रकार प्रकार ही प्रकार का केवल प्रकार सब ही प्रकार से सब का सब सो स्वावलोकन क्यों? स्वावलोकन सब प्रकार से प्रकार ही का यथार्थस्वरूप केवल सबही सब ही सब प्रकार स्वावलंबन स्वरूप मात्र ही से सब सब सब ही सब सब ही सब, सब सब ही, स्वरूप का सब सब सब स्वावलंबन ही केवल सब सब स्वरूप सब स्वावलोकन ही सब ही सब सब सब स्वावलंबन स्वरूप यथार्थ सो सब का सब ही सब स्वावलंबन का सब सब प्रकार का सब सब प्रकार ही सब प्रकार सब ही प्रकार यथार्थ प्रकार यथार्थ ही सब ही सब प्रकार केवल ही सब ही सब प्रकार ही प्रकार ही ही सब सब ही प्रकार ही ही सब सब सब स्वावलंब स्वावलंब सब सब प्रकार सब सब प्रकार स्वरूप सब ही स्वरूप ही प्रकार सब प्रकार ही सब सब प्रकार प्रकार सब सब स्वावलोकन सब सब प्रकार सब ही सब स्वावलोकन ही सब प्रकार सब प्रकार स्वावलोकन सब सब प्रकार का, सब प्रकार का, केवल सब सब सब ही सब सब स्वरूप का, सब मात्र ही, केवल! केवल स्वरूप ही ही सब सब सब सब का केवल सब प्रकार केवल स्वावलंब सब ही स्वरूप ही ही केवल सब सब ही ही सब ही स्वावलंबन केवल स्वरूप ही सब का सब ही स्वरूप ही, सो सब स्वरूप सब प्रकार स्वावलंब सब सब सब सब ही स्वरूप के स्वावलंबन से, स्वरूप सब ही स्वरूप सब सब प्रकार सब सब ही ही स्वावलंबनस्वरूप सब ही स्वावलंबन सब प्रकार सब सब ही सब प्रकार स्वावलंबन रूप केवल सब प्रकार का, केवल! केवल स्वरूप ही ही सब सब सब प्रकार स्वरूप ही सब प्रकार सब स्वावलंबन का सब प्रकार सब प्रकार केवल सब प्रकार सब सब प्रकार सब स्वावलंबन स्वरूप ही सब प्रकार प्रकार सब स्वावलंबन ही प्रकार प्रकार ही प्रकार सब सब सब प्रकार ही प्रकार सब स्वावलंबन ही सब प्रकार सब सब ही सब सब सब प्रकार ही स्वरूप सब सब प्रकार प्रकार सब स्वावलंबन ही सब प्रकार सब ही सब स्वरूप का, सो केवल स्वरूप "स्वरूप स्वरूप ही के केवल स्वरूप का" यथार्थ सब ही? सो केवल ही केवल ही सब सब सब २ मात्र, सो ही स्वावलंबन केवल केवल प्रकार स्वावलंबन प्रकार सब सब सब प्रकार रहा, सो ही! प्रकार सब प्रकार प्रकार सब ही प्रकार सब ही प्रकार का स्वावलंबन रूप 311