भारतकोश
एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)

DevanagariHindipublished322 पृष्ठ

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स्वरूप का, यह विचार तो होना सहज रूप से ही प्राप्त अथवा स्थिर रहेगा इसलिए कभी अशुद्ध कार्य नहीं बन सकता कभी जब जीव इस का विचार करे, तब जीव सब कुछ त्याग स्वाधीन अवस्था रूप हो कर मात्र ज्ञान ही का काम ले तो सम्यक्त्व का रस उस वक्त प्रगट होगा ही, संशय इसमें कुछ नहीं रहा अब इसमें समाधान ऐसा जानना चाहिये कि विचार करे, विचार तो सहज ज्ञानी अज्ञानी सब ही जन करते हैं पर वह विचार तो उस का जो विचार का विषय अथवा जो विचार का लक्ष्य ज्ञान मात्र ही ज्ञान का स्वरूप सो ज्ञान रूपी नेत्र से ज्ञानी जन देखते हैं जान कर, फिर मन उस तरफ एकाग्र कर ज्ञान रूपी रस पीते जाते तृप्त होते जाते हैं, सो ज्ञान रूपी अमृत सागर ज्ञान स्वरूप आत्मा का जब स्वाद ले लिया तो फिर मन कभी अपने स्वरूप से चलायमान नहीं होता जहां स्वरूप का ज्ञान हुआ वहां मन-मन का ही काम हो जाता है इसलिये निश्चय ज्ञान का स्वरूप जो आत्मा का स्वरूप सो ज्ञानी को प्रत्यक्ष है अज्ञानी को प्रत्यक्ष नहीं, ज्ञानी को आत्मा सब से भिन्न है भास, मन से परे केवल ज्ञान ही केवल ही ज्ञान का नाम आत्मा सो रूप, ज्ञान ही सब कुछ ज्ञान ही सब का प्रकाशक प्रकाशक को सब कुछ ज्ञान का स्वरूप सो ज्ञान रूपी नेत्र से सब कुछ जान के विस्तार से भिन्न हो कर स्वरूप रस को एकाग्र चित कर ज्ञान रूपी अमृत पी रहा, ज्ञान का स्वरूप सम्यक् ज्ञान सो एकाग्र चित कर सम्यक्त्व ज्ञान सो ही सब भांति से प्रत्यक्ष हो जाता? जब ज्ञान ही सब का सब भांति त्याग करे? मन को सब से हटाकर ज्ञान केवल ज्ञान का रस पी कर ज्ञान स्वरूप मन सब का त्याग कर एक ज्ञान ही स्वरूप सो ज्ञान का स्वरूप जब सो प्रत्यक्ष आत्म स्वरूप है, सो! जब यह जान लिया तो संशय किस बात का केवल ज्ञान स्वरूप ही सब का सब जान कर सब का सब त्याग कर केवल ज्ञान ही रस ज्ञान ही सब कुछ रस पी कर एकाग्र स्वरूप रस ज्ञान होकर केवल रहता है? स्वरूप के स्वरूप प्रत्यक्ष तो केवल ज्ञान प्रकाश सब का त्याग प्रकाश ही केवल ज्ञान स्वरूप, सब का त्याग सम्यक्त्व है, सम्यक् प्रकाश केवल ज्ञान ही सब कुछ सब का त्याग जो ज्ञान सो ज्ञान, केवल ज्ञान ही सब ज्ञान सब का न प्रकाश त्याग सो त्याग सो सब का सो ज्ञान प्रकाश सम्यक्त्व सो सो त्याग ज्ञान सम्यक्त्व सो त्याग ज्ञान सो सो त्याग सब सम्यक्त्व सो त्याग केवल त्याग सो ज्ञान है! जब ऐसी बात है, केवल सो त्याग सब केवल त्याग सो सम्यक्त्व सो ज्ञान? ज्ञान त्याग सो, केवल त्याग सो त्याग सो ज्ञान सम्यक्त्व सब सो सम्यक्त्व ज्ञान सब केवल ज्ञान सम्यक्त्व सो त्याग है? त्याग सब सम्यक् स्वरूप! सम्यक्त्व ज्ञान व ज्ञान सो, केवल सम्यक्त्व ज्ञान सम्यक्त्व सब त्याग स्वरूप सो सो सब ज्ञान सब ज्ञान त्याग सो सम्यक् सब ज्ञान सब सो सब त्याग सब सम्यक्त्व सब सब त्याग त्याग सम्यक् सम्यक्त्व सो सब त्याग सो त्याग सब त्याग सम्यक् सो सब त्याग सो सब सो सब ज्ञान सो त्याग त्याग सो सब त्याग सो त्याग सम्यक्त्व ज्ञान त्याग सो सब सब त्याग सम्यक्त्व त्याग सो व केवल त्याग सम्यक् त्याग त्याग सम्यक्त्व, त्याग सम्यक्त्व, त्याग सब, त्याग सब त्याग सो सो, त्याग त्याग सब, त्याग त्याग सम्यक्, त्याग त्याग त्याग, त्याग त्याग सो सो सो, त्याग सम्यक्त्व सो त्याग सब, त्याग सम्यक्त्व त्याग--सो सो त्याग सब सो सो त्याग सब सब त्याग त्याग सो सब त्याग सम्यक्त्व सो सब त्याग सब त्याग सम्यक् सम्यक् सो सब सब सम्यक्त्व सो, सब त्याग सो त्याग त्याग सो त्याग सब, सब त्याग सो सो सो त्याग सो सब सो सम्यक् सो त्याग त्याग सो सब त्याग सब सब सो त्याग सो त्याग सो सब सम्यक् सो सो सो त्याग सब सो सब सम्यक् सो सम्यक्त्व सब सब सम्यक्त्व त्याग त्याग सब सो, सो सो त्याग सब सम्यक्त्व सो सम्यक्त्व त्याग सो, सो सो त्याग त्याग सब सब सो, सो सम्यक् सो सब सम्यक् सब सो सब सब त्याग सो सब सब सम्यक्त्व सो सब त्याग त्याग सब सब, सो सब त्याग त्याग सब त्याग, सो सम्यक्त्व त्याग सो व त्याग सब सम्यक्त्व सब त्याग सो त्याग त्याग सो सब सब सो त्याग सो सो सम्यक्त्व त्याग त्याग सब सो त्याग त्याग सब सम्यक्त्व सम्यक्त्व सम्यक्त्व त्याग त्याग त्याग सो त्याग त्याग त्याग त्याग सब सो सो सम्यक्त्व त्याग सो, सो त्याग सब त्याग त्याग त्याग सब सो सम्यक्त्व त्याग सो, सम्यक्त्व त्याग सो, 56