भारतकोश
माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त)

माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त) · राजयोग मेडिटेशन अकादमी / ओशो · 1974 (उद्गम)

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स्वरूप है आत्मा, यह उस समय प्रत्यक्ष भासने पर ही संभवित, प्रमाण का विषयभूत, प्रमाणका फल होगा, प्रमाणताका फल दूसरा तो नहींहोगा॥ स्वभावका पर रूप होकर परिणमना स्वरूपके नाश बिना कदापि संभवित नहींहोगा क्योंकि स्वभाव परिणाम स्वभावका अभाव होता नहीं।और जो ज्ञेय वस्तुका रूप आत्मा परिणम गया तो ज्ञेय रूप केवल ज्ञानादि रूपमें परिणमे ऐसी बात घटती नहीं।अथवा आत्मा ज्ञेयका रूप हुआ, तदाकार रूप स्वयं हुआ, ज्ञेयका रूप आत्मा हुआ ऐसा मानने पर आत्माका नाश सिद्ध होगा, इसलिये आत्मा ज्ञेय रूप नहींहोता।अथवा ज्ञेय रूप हुआ तो ज्ञेयका अभाव हुआ।कारण कि जो वस्तुका स्वभाव है उसका नाश होनेपर वस्तुका स्वभाव नष्ट होनेपर नष्ट हुआ ही कहा जायगा, उस समय आत्माका स्वरूप नष्ट हो जायगा कि जो आत्मा चैतन्यरूप ज्ञायक स्वभाववान्‌ वस्तु है।सो ऐसे ज्ञेय रूप आत्मा हुआ ऐसा माननेपर ज्ञेयका नाश और आत्माका स्वरूप नाश होगा? सो आत्मा नित्य है सो ज्ञेय रूप ज्ञान परिणमे तब ज्ञेयका सद्भाव, ज्ञेयके जाननहार आत्माका सद्भाव प्रत्यक्ष अपने ज्ञान द्वारा सिद्ध है।इस प्रकार केवल ज्ञान स्वभाव स्वरूपके नाश बिना ज्ञेयका ज्ञान सिद्ध होगा, सोई बात इस सिद्धान्त ग्रन्थमें कही है, तथा समन्तभद्र स्वामीने आप्तमीमांसा-ग्रंथके मध्यमें इस बातको सिद्ध की कि स्व पर प्रकाशक जो ज्ञान सो सम्यक्, ज्ञान का ज्ञान और ज्ञेयका ज्ञान ऐसे दोनो प्रकारका ज्ञान सम्यक् ज्ञानीके ज्ञानमें इस प्रकार भासता सोई सम्यक् ज्ञान ज्ञानीके ज्ञानमें भासता कि नहींभासता?जो सम्यक् ज्ञानीके ज्ञानमें स्व पर प्रकाशकपनेका ज्ञान नहींहोगा प्रमाणका फल सम्यक् ज्ञान होगा ऐसा घटता नहींसो प्रमाणताका फल सम्यक् ज्ञान जानना, जो सम्यक् ज्ञान सो केवल ज्ञान ही घटता और केवल ज्ञान सो सम्यक् ज्ञान प्रमाणका फल घटता नहीं। तब तो केवल ज्ञान प्रमाण ही घटता, सो प्रमाणका फल सम्यक् ज्ञान सो भी घटता? सो तो मिथ्या ही बात घट जायगी।परंतु ज्ञान और ज्ञेयका स्वभाव भिन्न परिणमता सो प्रमाणका फल सम्यक् ज्ञान कहिये।इस प्रकार ज्ञानीके ज्ञानमें घटता सो ज्ञान घटता, ज्ञेय घटता नहीं,परंतु सम्यक् ज्ञानीके ज्ञानमें, सम्यक्‌पना ज्ञान और ज्ञेयका भिन्नपना सो ही ज्ञान हुआ सो प्रमाणका फल सिद्ध हो सकता सो सम्यक् ज्ञानमें सम्यक् ज्ञानी? सम्यक्‌पना यह नाम जो है सो ज्ञानका ही नाम है।परंतु यह नाम ज्ञेयका तो नहींहोता।इसलिये जो, सम्यक्‌पना नाम ज्ञानीके ज्ञानका सो ज्ञानीके ज्ञानको ही सम्यक् ज्ञान नाम घटता ज्ञानीका सो ज्ञान ज्ञेयके भिन्नपनेका नाम घटता, ज्ञेयका ज्ञान भिन्न स्वरूप कहियेगा, ज्ञेयका ज्ञान भिन्न स्वरूप नहींघटता।परंतु जो ज्ञेय पदार्थ है वह तो अपने रूप ज्ञेयमें घटता और ज्ञानीका ज्ञान ज्ञानीके रूपमें घटता ऐसा ज्ञान और ज्ञेय भिन्नपना ज्ञानीके ज्ञानमें घटा सो सम्यक् ज्ञान घट गया, सम्यक् ज्ञान सो ज्ञान, अज्ञानीके घट गया नहीं।सम्यक् ज्ञान जो, ज्ञानीके घट गया! इससे सिद्ध हुआ सो सम्यक् ज्ञान जो है, सम्यक्‌पना घट गया सोई सम्यक् ज्ञान अपने रूप ज्ञानीके ज्ञानमें घटा॥ सो बात यह, कि सम्यक्‌पना जो, सो ज्ञानका ही, सो ही ज्ञानीके ज्ञान का, ज्ञानीका ही सम्यक् ज्ञान सो, ज्ञानीके ज्ञानमें घट गया।सम्यक् ज्ञान सो ज्ञेय पदार्थके ज्ञानमें नहींघटता सो, अज्ञानीके घट, सम्यक् ज्ञान ज्ञेयके ज्ञानमें सो ही ज्ञेयके ज्ञान में, ज्ञेयके ज्ञान सम्यक् ज्ञान सो ही घटता इस प्रकार जो, सम्यक्‌पना नाम सो ज्ञेयके सो ज्ञानमें अज्ञानी घट गया सो ज्ञान सिद्ध हुआ? इससे क्या सिद्ध? ज्ञानीके स्व पर का ज्ञान हुआ सो ही केवल ज्ञानावरण क्षय-उपशमका सम्यग्ज्ञान सम्यक् ज्ञान रूप घटता, ज्ञानी के सम्यग्ज्ञान केवल ज्ञानावरण के क्षयका सम्यग्ज्ञान सो ज्ञानी के ज्ञान का क्षयो-पशम केवल ज्ञान केवल ज्ञानावरण क्षय सम्यग्ज्ञान सो सम्यक् ज्ञानका ही ज्ञान हुआ फल सम्यक् ज्ञान सोई सम्यक् ज्ञान सम्यक् ज्ञानीका फल, सम्यक् ज्ञानका क्षयो-पशम सम्यक् ज्ञानी सम्यक् ज्ञान ज्ञानका फल सम्यक् ज्ञान ज्ञानके ज्ञानका फल सम्यक् ज्ञान ज्ञानी सम्यग्ज्ञान सम्यक् ज्ञानी सम्यक् ज्ञान सो, सम्यक् ज्ञान सो ज्ञान ज्ञानी का ज्ञेयका सो ज्ञेयका सम्यक् ज्ञान सो नहींहोता, ज्ञेयके, ज्ञानके, सम्यक्‌पना न होता, सो ज्ञेय स्वरूप घटा सो ऐसा पर का ज्ञान सम्यग्ज्ञान ज्ञानी ज्ञान सो पर ज्ञेय ज्ञानी के ज्ञानका सो सम्यक्, सो ऐसा ज्ञान सो ज्ञानका सम्यक्, सो ज्ञेय का ज्ञेय सम्यक् सो ज्ञेयके सो ज्ञेयके सम्यक् स्वरूप सम्यक् सो ज्ञेयके, ऐसा सम्यक् सम्यक् ज्ञेय सम्यक् सम्यक् सो ज्ञेय स्वरूप, सम्यक् स्वरूप ऐसा ज्ञेयका सम्यक् सो सो स्वरूप ज्ञेय सम्यक् स्वरूप ज्ञेय स्वरूप न घटता ऐसा सो ज्ञेय स्वरूप सम्यक् सो ज्ञेय ज्ञेय का ज्ञेय सम्यक् सम्यक् घटता, ज्ञेय स्वरूप ऐसा सम्यक् ज्ञेय सम्यक् स्वरूप सम्यक् सो ज्ञेय का ज्ञेय सम्यक् सम्यक् सो ज्ञेय, ज्ञेय स्वरूप ज्ञेय सम्यक् सो सो ज्ञेय सम्यक् सम्यक् सो ज्ञेय सो ज्ञेय, ज्ञेय सो ज्ञेय ज्ञेय सो ज्ञेय सम्यक् ज्ञेय सो ज्ञेय, ज्ञेयका सो सम्यक्, ज्ञेयका सो सम्यक्, ज्ञेयका सो सम्यक्, ज्ञेय सम्यक् सो ज्ञेय सम्यक् सम्यक् सो ज्ञेय ज्ञेय ज्ञेय ज्ञान सम्यक्‌पना, ज्ञेय ज्ञान सो, ज्ञेय ज्ञान सम्यक् न ज्ञेय ज्ञान ज्ञेय सम्यक् 103