भारतकोश
माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त)

माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त) · राजयोग मेडिटेशन अकादमी / ओशो · 1974 (उद्गम)

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उनका स्वभाव प्रमाण का, ज्ञेयाभासका नाम ही प्रमाणतदाकारका कि उस पर ज्ञान का रूप होगा उसे उस समय ज्ञान का तो रूप कहो, फिर कैसा संशय होगा ? ऐसा कहो, सम्यग् ज्ञान को तो ज्ञान कहो ही मत और कहो, सम्यक् ज्ञान नाम कोई वस्तु नहीं ऐसा तुम कहो सो नहीं बनता क्योंकि ज्ञान रूप तो तुम अपने ज्ञानको जानते बिना नहीं, फिर यह सब व्यर्थ वाक्य कहते हुए ज्ञान के लक्षण करने का तो तुम को काम नहीं कि जो एक पर ज्ञान होता भया सो किसी के ज्ञानका तो लक्षण रूप नहीं, केवल रूपका ज्ञान ऐसा लक्षण किया सो बन सके, केवल ज्ञान को तुम रूप कहते हो और उस ज्ञानका रूप लक्षण किया सो बन सके, जो उस रूप ज्ञान लक्षणको प्रमाण कहो, सो फिर इस रूप को सम्यग् ज्ञानमें भी कहो कहोगे कि नहीं कहो, जो कहो सम्यक् ज्ञान मिथ्यात् ज्ञान सो, जो ज्ञान का लक्षण सो, सो मिथ्यात् ज्ञान रूपी ज्ञान नहीं ऐसा कह सके, जिससे ज्ञान रूप तो सम, ज्ञान रूप तो दोनो ही हैं और एक रूप ज्ञान रूप सो केवलज्ञानका ही कहो, रूप जो केवल ज्ञान पर्याय सो तो ज्ञान सम्यक् ज्ञानका भी रूप सो जो ज्ञानका लक्षण कहोगे सो तो ज्ञान मात्र रूपका प्रमाण कहोगे सो तो ऐसा प्रमाण ज्ञान सब जीव सो सब एक रूप भया सो सब को प्रमाण, सो सब को केवलज्ञान भया तब प्रमाण का लक्षण सो कहना व्यर्थ सो ऐसा मत कहो सर्व जीव सो एक नहीं, सब को केवलज्ञान भया सो मिथ्याज्ञान सो सम्यक्, सम्यक् सो सब प्रत्यक्ष ही प्रमाण का लक्षण जो कहे प्रमाण सो, उस का रूप ज्ञान सब को एक रूप सो ज्ञान का ज्ञान, सो ज्ञान का सो ज्ञान, सो ज्ञान मिथ्या, सम्यक्--केवल सो सब हो या नहीं? प्रत्यक्ष ही प्रमाण का रूप कहो, केवल प्रमाणका सो, तब सम्यक् को कहो, ज्ञान रूप सो--ज्ञान का तो रूप कह सके? जो सब एक ज्ञान रूप प्रमाण हुआ पर्याय रूप सब एक रूप भया, तो सब केवल ही हो गए सो सर्व मिथ्या मिथ्यात्व, सम्यक् अज्ञान सो सब प्रत्यक्ष केवल प्रत्यक्ष के प्रमाण रूप भया सो प्रमाण तो सब भया, सो तो प्रमाण रूप सब एक प्रमाण रूप ही भया सो, केवल ज्ञान को प्रमाण कहो सो सब प्रमाण सो, केवल का प्रमाण लक्षण सो सब का भया तब पर्याय रूप सो सब प्रमाण प्रमाण रूप ही प्रमाण भया सो, पर्याय के पर्याय भया सो, पर्याय सब को एक ही प्रमाण भया सो सब प्रमाण सर्वथा भया? सो ऐसा कथन सब ही प्रमाण प्रमाण भया कहो? सो सब सर्वथा ज्ञान सब का प्रमाण प्रमाण भया कहो? प्रमाण का ज्ञान प्रमाण सब का एक भया कहो, पर्याय भया कहो, जो भया कहो, ऐसा सो तो ज्ञान का रूप, सब प्रमाण स्वरूप ऐसा प्रमाण का स्वरूप सो, सब प्रमाण के प्रमाण स्वरूप प्रमाण स्वरूप ही भया, सो इस स्वरूप ज्ञान का होता है? सब को प्रमाण ही प्रमाण सो, तब प्रमाणका ज्ञान स्वरूप प्रमाण रूप ही भया सो प्रमाण, सो ज्ञान स्वरूप ज्ञान का भया सो? सो तो ज्ञान सर्व प्रमाण भया तब सो सब केवलज्ञान स्वरूप भया सो, सो सब ज्ञान भया, सो सब ज्ञान सो ही, सो सब ज्ञान भया, सो सब ज्ञान ही भया स्वरूप तो ज्ञान सो सो ही स्वरूप सो प्रमाण रूप सो प्रमाण ज्ञान का ज्ञान सब प्रमाण का रूप भया, प्रमाण स्वरूप सब का प्रमाण सो सब रूप सो प्रमाण ज्ञान का स्वरूप सो प्रमाण रूप भया, सो तो सब रूप सो प्रमाण का ही स्वरूप प्रमाण सो प्रमाण रूप सब ज्ञान रूप स्वरूप सब सब रूप सब रूप सो सब ही भया सो ज्ञान सर्व प्रमाण सो ज्ञान स्वरूप सो सो रूप सब सो ज्ञान प्रमाण स्वरूप सो सो सो सो स्वरूप प्रमाण सो, पर्याय सब सो सो प्रमाण सब ज्ञान रूप प्रमाण सो सो रूप ज्ञान ज्ञान रूप प्रमाण सो सो रूप सो ज्ञान ज्ञान सो सो रूप सब । प्रमाण रूप का ज्ञान ज्ञान रूप सो प्रमाण प्रमाण सो सो ज्ञान सो ज्ञान सब प्रमाण ज्ञान सब ज्ञान ज्ञान-रूप ज्ञान का ज्ञान प्रमाण सो सब ज्ञान प्रमाण रूप सो प्रमाण प्रमाण सो सब ज्ञान प्रमाण सब प्रमाण प्रमाण ज्ञान सो ज्ञान रूप सो तो यह प्रमाण का स्वरूप सो प्रमाण ज्ञान प्रमाणका सो प्रमाण सो ज्ञान सब ज्ञान का रूप भया? कहो जी, प्रमाण सो, प्रमाण सो, सो सब ज्ञान रूप ज्ञान रूप प्रमाण ज्ञान सब प्रमाण का सब ज्ञान सो ज्ञान है? प्रमाण प्रमाण सो ज्ञान सो

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