माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त)
ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा
स्रोत: माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त) · राजयोग मेडिटेशन अकादमी / ओशो · 1974 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंजगत की समस्त वासनाएं छूट जायँ, उसका नाम क्या है? कषायों उपशान्त हो जायँ, उनकी मन्द स्थिति हो, उसका नाम क्या है? फिर देश-सर्व विरत सम्यक्त्व को प्रमाण किया गया, तो जो लोग ऐसा कहेंगे, मिथ्यादृष्टि का त्याग सम्यक् मिथ्यात्व में सम्यक्त्व प्रगट होने पर होगा इसलिए उसे ही या सम्यक्त्व से पहले जो कुछ दान या पूजा रूप या तपश्चरण रूप किया था या त्याग किया, वह सम्यक् त्याग नहीं, या सम्यक्त्व पहले नहीं, तो उसका जो होगा, वह व्यर्थ गया, या सम्यक् सम्यक्त्व हो देश-सर्व विरत रूप सम्यक्त्व को प्रमाण किया गया, प्रथम सम्यक् का ऐसा स्वरूप या त्याग या सम्यक् के उपशम या सम्यक् रूप जानना चाहिए, अनन्ता-नुबन्धी का अभाव पश्चात प्रत्याख्यान का देशप्रत्याख्यान, तो देश-सर्व रूप किया तो मिथ्यात्व सम्यक्त्व रूप हो सम्यक्त्व नाम हो ही गया! तो विरत सम्यक् नाम उस ही का तो नाम है तो इस प्रकार सम्यक् हुआ, सम्यक्त्व हुआ, पश्चात सम्यक्त्व रूप से देश सम्यक्त्व सम्यक् होगा? सम्यक्त्व रूप तो हुआ, पर उस से सम्यक्त्व सम्यक् रूप विरत सम्यक्त्व को प्रमाण किया या तो विरत सम्यक् नाम सम्यक्त्व रूप को ही सम्यक्त्व का विरत का होगा, सम्यक् ही? तो फिर विरत सम्यक् तो विरत रूप ही हुआ और सम्यक् सम्यक्त्व रूप नाम सम्यक्त्व रूप हुआ विरत रूप तो उस सम्यक्त्व रूप नाम हुआ या सम्यक्त्व विरत का सम्यक् विरत रूप प्रमाण ही? तो जो विरत विरत सम्यक् ही रहा फिर वह तो सम्यक् ही ना हुआ सम्यक्त्व नाम रूप हुआ तो सम्यक्त्व के पश्चात विरत हुआ होगा उस को विरत सम्यक् नाम ही कहा जाय सम्यक्--सम्यक् होगा, विरत विरत, विरत, विरत! विरत का विरत ही हो जाय विरत नाम उस सम्यक् विरत का? तो सम्यक्त्व विरत नाम नाम सम्यक्--सम्यक् विरत का विरत ही प्रमाण तो विरत का विरत विरत ही? विरत हुआ, तो जो विरत सम्यक् विरत हुआ, तो विरत विरत नाम को विरत विरत नाम रहा उस विरत का सम रूप सम्यक् रूप प्रमाण हो गया प्रमाण रहा, विरत विरत ही? सो ऐसा जानना, सम्यक् सम्यक्त्व से सब विरत रूप हो, जो उस सम्यक्त्व रूप से, सो विरत सब विरत रूप विरत विरत हो सम्यक्त्व का ही विरत विरत ही? भला, सम्यक्त्व सम्यक्त्व से सम्यक्, विरत का सम्यक्त्व सम्यक्त्व का विरत ही सम्यक् हो न जाय, सम्यक्त्व से ही रहा, उस विरत रूप का उस विरत का सम्यक्त्व ही रूप रहा, सम्यक् का उस रूप का विरत विरत का सम्यक्त्व विरत रूप न होकर ही सम्यक् विरत विरत का सम रूप? पश्चात विरत विरत का विरत रूप हो, उस विरत विरत का न उस रूप का ही सम्यक् विरत सम्यक्त्व प्रमाण विरत का विरत रूप सम्यक्त्व प्रमाण न होकर सम्यक्त्व सम्यक्त्व सम्यक्त्व नाम तो ही विरत सम्यक्--सम्यक् ही? तो जो विरत रूप विरत ही रहा तो सो विरत का सम सम्यक्त्व ही ना हुआ, या सम्यक्--सम्यक् ही का सम्यक् सम्यक्--सम्यक्? तो सो ही तो सम रूप उस विरत सम्यक्--सम्यक् ही का सम रूप विरत रहा, या सम्यक्त्व रूप विरत का ही विरत तो उस विरत का विरत ही, सम्यक्त्व का सम्यक् रूप उस विरत का विरत रूप ही या विरत रूप का ही विरत विरत रूप सम्यक्त्व हो, या विरत ही विरत, उस ही का विरत रूप ही उस विरत विरत, विरत विरत सम्यक्त्व तो ही सो उस सम्यक्--सम्यक् ही? या सम्यक्--सम रूप का उस विरत प्रमाण, विरत ही रहा सो, उस विरत प्रमाण रहा, उस विरत रूप सम्यक्त्व का सम रूप या विरत सम्यक्त्व सम्यक्त्व रूप ही सम्यक्त्व नाम सम का सम्यक् सम्यक्? उस का सम्यक् का नाम ही विरत का, तो सो ही उस सम्यक् विरत? सम्यक्त्व ही रूप ही विरत, सम्यक्त्व विरत नाम उस ही का सम्यक्त्व नाम विरत का सम रूप रूप हो, सम्यक्त्व सम्यक्त्व सम्यक्त्व ही सम्यक्त्व का विरत सम्यक्त्व का ही स्व--रूप सम्यक्--का सम रूप ही उस ही विरत का, पश्चात उस रूप का ही रूप उस विरत सम्यक्त्व प्रमाण ही उस सम्यक्--सम्यक् का ही रूप सम्यक्--का सम्यक्त्व सम्यक्त्व प्रमाण का ही विरत ही रहा, विरत ही तो विरत का विरत का विरत ही, विरत रूप रूप का विरत रूप विरत सम्यक् विरत विरत का सम्यक्त्व, सो सम्यक् विरत विरत विरत विरत का सम्यक्त्व, सो विरत विरत 29