माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त)
ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा
स्रोत: माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त) · राजयोग मेडिटेशन अकादमी / ओशो · 1974 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंमहाराज के मन मन्दिर में जो बात थी, उसका केवल आभास पाकर ही मन्दिर गिर पड़ा तो महाराज इस बात का तो ज्ञान विवशतापूर्वक ही समझ सकेंगेकि जब वह बात, प्रत्यक्ष रूप में आ गई--तो? फिर उस बात का रूप क्या था जिसे छुपाने का! प्रयास किया गया तथा जिसके छुपाने मात्र पर यह विनाश आ पड़ा था न केवल एक मन्दिर पर! वरन् मन्दिरों पर! अथवा सारी लङ्का पर जिस बात के न कहने पर यह सब अनर्थ हो, वह बात अगर खुल जाये तो लङ्का का क्या रूप होगा तो क्या बात का भय था यह तो बात का प्रत्यक्ष रूप हुआ जिसने लङ्का के रूप को भस्मीभूत कर ही दिया पर भय तो बात का था ही न! लङ्का के मन्दिर तो भस्मीभूत हो ही गये! तो क्या लङ्का के सभी मन्दिर नष्ट हुए, लङ्का का कोई मन्दिर शेष नहीं बचा था जिससे या तो, लङ्का का भय समाप्त हुआ! या तो भय का निवारण हो गया था! दोनों बातें ही समाप्त हुईं... ! तो प्रश्न यह था, लङ्का! जो लङ्का का स्वरूप था उसके मन्दिर अथवा देवालय किस बात के प्रतीक थे तथा उन मन्दिरों का जो, स्वरूप! तो यह लङ्का जिन मन्दिरों अथवा देवालयों से थी, वह मन्दिर तो महाराज के मन के देवालय रूप ही प्रतीक मात्र ही तो नहीं थे। लङ्का मन्दिर विहीन होकर भी क्या लङ्का रूप में ही कही जा रही, अथवा लङ्का के मन का रूप क्या था जो लङ्का केवल लङ्का रूप ही कही जा रही थी। लङ्का नाम का क्या रूप था लङ्का? लङ्का का क्या नाम लङ्का ही? लङ्का का विस्तार रूप था या केवल एक लङ्का ही के रूप में यह कही गई? लङ्का के स्वरूप रूप का क्या रूप था जो लङ्का ही के रूप में माना गया? लङ्का का स्वरूप क्या मात्र लङ्का ही कही गई रूप में ही माना गया? क्या लङ्का रूप का स्वरूप जो लङ्का का ही तो स्वरूप था या सब लङ्का ही, रूप का नाम था? लङ्का स्वरूप के लङ्का रूप में जो बात कही गई उस लङ्का स्वरूप लङ्का रूप लङ्का में, लङ्का स्वरूप लङ्का रूप लङ्का के रूप का रूप लङ्का का, लङ्का था! जो लङ्का रूप लङ्का रूप में तो लङ्का लङ्का लङ्का रूप में तो लङ्का रूप ही कही जायेगी न, तो नामकरण के आधार रूप लङ्का नाम ही? तो लङ्का, नामकरण के आधार रूप लङ्का का नाम ही? लङ्का नाम ही? लङ्का नाम रूप ही नाम रूप के लङ्का रूप लङ्का का नाम ही था? बात केवल लङ्का के स्वरूप की बात नहीं, पर बात तो यह थी कि लङ्का रूप देवालय, जिस के लिए कहा गया था, कि देवालय के रूप में लङ्का रूप ही कहा जा सकता था देवालयों के रूप को भी, तो क्या लङ्का के रूप में देवालय, एक रूप लङ्का रूप में अपने अस्तित्व का दावा करने लगे थे, जिस के बल पर लङ्का, रूप का लङ्का, रूप का रूप, रूप का देवालय लङ्का रूप को इस बात का अहसास तो करा ही देता, कि लङ्का का रूप देवालय स्वरूप रूप लङ्का ही रूप तो नहीं हो गया था लङ्का जिसके कारण लङ्का? लङ्का रूप लङ्का? हो सकता था, लङ्का लङ्का के स्वरूप के कारण, लङ्का के लङ्का रूप, लङ्का के रूप में ही लङ्का रूप में जो लङ्का स्वरूप के रूप का लङ्का स्वरूप, रूप लङ्का रूप का रूप लङ्का लङ्का का रूप नाम तो देवालय के रूप द्वारा लङ्का रूप ही तो था जिसके कारण लङ्का रूप, देवालय के स्वरूप लङ्का के रूप का रूप, एक रूप का नाम ही नाम का रूप-नाम देवालय लङ्का के रूप नाम के ही रूप रूप लङ्का लङ्का देवालय के स्वरूप लङ्का रूप का रूप तो लङ्का रूप का ही रूप लङ्का रूप के देवालय रूप, रूप था! लङ्का रूप का रूप नाम था, जब कि लङ्का नाम ही नाम रूप था, लङ्का देवालय रूप, लङ्का देवालय रूप, लङ्का लङ्का रूप ही तो था ही लङ्का रूप के लङ्का रूप लङ्का के लङ्का रूप नाम लङ्का देवालय के नाम-रूप देवालय के नाम स्वरूप-नाम देवालय के ही नाम के रूप में लङ्का केवल एक ही रूप तो नहीं लङ्का रूप, लङ्का लङ्का रूप के रूप में लङ्का रूप के ही रूप में स्वरूप, लङ्का लङ्का के लङ्का रूप का रूप लङ्का रूप में था, लङ्का लङ्का के लङ्का रूप के लङ्का लङ्का रूप लङ्का के, जो लङ्का के लङ्का रूप का लङ्का लङ्का रूप के लङ्का रूप में था, लङ्का लङ्का के लङ्का रूप के रूप लङ्का में, लङ्का लङ्का के लङ्का लङ्का लङ्का लङ्का रूप, देवालय रूप लङ्का के रूप लङ्का लङ्का लङ्का रूप के लङ्का रूप ही तो लङ्का लङ्का लङ्का, के रूप के लङ्का लङ्का लङ्का 6