पद्म पुराण
Padma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1012, कुल 1018 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरखण्ड ] * श्रीराम-नामकी महिमा तथा श्रीरामके १०८ नामका माहात्म्य * १९५
लक्ष्मीपतिको पूजन अवश्य करो। भद्रे ! मैं तुम-जैसी वैष्णवी पत्नीको पाकर अपनेको कृतकृत्य मानता हूँ।
**वसिष्ठजी कहते हैं—**तदनन्तर वामदेवजीके उपदेशानुसार पार्वतीजी प्रतिदिन श्रीविष्णुसहस्रनामका पाठ करनेके पश्चात् भोजन करने लगीं। एक दिन परम मनोहर कैलासशिखरपर भगवान् श्रीविष्णुकी आराधना करके भगवान् शङ्करने पार्वतीदेवीको अपने साथ भोजन करनेके लिये बुलाया। तब पार्वतीदेवीने कहा—'प्रभो ! मैं श्रीविष्णुसहस्रनामका पाठ करनेके पश्चात् भोजन करूँगी, तबतक आप भोजन कर लें।' यह सुनकर महादेवजीने हँसते हुए कहा—'पार्वती ! तुम धन्य हो, पुण्यात्मा हो; क्योंकि भगवान् विष्णुमें तुम्हारी भक्ति है। देवि ! भाग्यके बिना श्रीविष्णु-भक्तिका प्राप्त होना बहुत कठिन है। सुमुखि ! मैं तो 'राम ! राम ! राम !' इस प्रकार जप करते हुए परम मनोहर श्रीराम-नाममें ही निरन्तर रमण किया करता हूँ। राम-नाम सम्पूर्ण सहस्रनामके समान है। पार्वती ! रकारादि जितने नाम हैं, उन्हें सुनकर रामनामकी आशङ्कासे मेरा मन प्रसन्न हो जाता है।* अतः महादेवि ! तुम राम-नामका उच्चारण करके इस समय मेरे साथ भोजन करो।'
यह सुनकर पार्वतीजीने राम-नामका उच्चारण करके भगवान् शङ्करके साथ बैठकर भोजन किया। इसके बाद उन्होंने प्रसन्नचित्त होकर पूछा—'देवेश्वर ! आपने राम-नामको सम्पूर्ण सहस्रनामके तुल्य बतलाया है। यह सुनकर राम-नाममें मेरी बड़ी भक्ति हो गयी है; अतः भगवान् श्रीरामके यदि और भी नाम हों तो बताइये।'
**महादेवजी बोले—**पार्वती ! सुनो, मैं श्रीरामचन्द्रजीके नामोंका वर्णन करता हूँ। लौकिक और वैदिक जितने भी शब्द हैं, वे सब श्रीरामचन्द्रजीके ही नाम हैं। किन्तु सहस्रनाम उन सबमें अधिक है और उन सहस्रनामोंमें भी श्रीरामके एक सौ आठ नामोंकी प्रधानता अधिक है। श्रीविष्णुका एक-एक नाम ही सब वेदोंसे अधिक माना गया है। वैसे ही एक हजार नामोंके समान अकेला श्रीराम-नाम माना गया है। पार्वती ! जो सम्पूर्ण मन्त्रों और समस्त वेदोंका जप करता है, उसकी अपेक्षा कोटिगुणा पुण्य केवल राम-नामसे उपलब्ध होता है।† शुभे ! अब श्रीरामके उन मुख्य नामोंका वर्णन सुनो, जिनका महर्षियोंने गान किया है। १ ॐ श्रीरामः—जिनमें योगीजन रमण करते हैं, ऐसे सच्चिदानन्दघनस्वरूप श्रीराम अथवा सीता-सहित राम। २ रामचन्द्रः—चन्द्रमाके समान आनन्ददायी एवं मनोहर राम। ३ रामभद्रः—कल्याणमय राम। ४ शाश्वतः—सनातन भगवान्। ५ राजीवलोचनः—कमलके समान नेत्रोंवाले। ६ श्रीमान् राजेन्द्रः—श्रीसम्पन्न राजाओंके भी राजा, चक्रवर्ती सम्राट्। ७ रघुपुङ्गवः—रघुकुलमें सर्वश्रेष्ठ। ८ जानकीवल्लभः—जनककिशोरी सीताके प्रियतम। ९ जैत्रः—विजयशील। १० जितामित्रः—शत्रुओंको जीतनेवाले। ११ जनार्दनः—सम्पूर्ण मनुष्योंद्वारा याचना करने योग्य। १२ विश्वामित्रप्रियः—विश्वामित्रजीके प्रियतम। १३ दान्तः—जितेन्द्रिय। १४ शरण्यत्राणतत्परः— शरणागतोंकी रक्षामें संलग्न। १५ बालिप्रमथनः—बालि नामक वानरको मारनेवाले। १६ वाग्मी—अच्छे वक्ता। १७ सत्यवाक्— सत्यवादी। १८ सत्यविक्रमः—सत्य-पराक्रमी। १९ सत्यव्रतः—सत्यका दृढ़तापूर्वक पालन करनेवाले। २० व्रतफलः— सम्पूर्ण व्रतोंके प्राप्त होने योग्य फलस्वरूप। २१ सदा हनुमदाश्रयः— निरन्तर हनुमान्जीके आश्रय अथवा हनुमान्जीके हृदयकमलमें सदा निवास करनेवाले।
* राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥
रकारादीनि नामानि शृण्वतो मम पार्वति। मनः प्रसन्नतां याति रामनामाभिशङ्कया ॥ (२८१। २१-२२)
† विष्णोरेकैकनामैव सर्ववेदाधिकं मतम्। तादृङ्नामसहस्राणि रामनाम समं मतम् ॥
जपतः सर्वमन्त्रांश्च सर्ववेदांश्च पार्वति। तस्मात् कोटिगुणं पुण्यं रामनाम्नैव लभ्यते ॥ (२८१। २७-२८)