भारतकोश
पद्म पुराण

पद्म पुराण

Padma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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९९६* अर्चयस्व हृषीकेशं यदीच्छसि परं पदम् *[ संक्षिप्त पद्मपुराण

२२ कौसलेयः—कौसल्याजीके पुत्र। २३ खरध्वंसी—खर नामक राक्षसका नाश करनेवाले। २४ विराधवध-पण्डितः—विराध नामक दैत्यका वध करनेमें कुशल। २५ विभीषणपरित्राता—विभीषणके रक्षक। २६ दशग्रीवशिरोहरः—दशशीश रावणके मस्तक काटनेवाले। २७ सप्ततालप्रभेत्ता—सात तालवृक्षोंको एक ही बाणसे बींध डालनेवाले। २८ हरकोदण्ड-खण्डनः—जनकपुरमें शिवजीके धनुषको तोड़नेवाले। २९ जामदग्न्यमहादर्पदलनः—महान् अभिमानको चूर्ण करनेवाले। ३० ताडकान्तकृत्—ताड़का नामवाली राक्षसीका वध करनेवाले। ३१ वेदान्तपारः—वेदान्तके पारङ्गत विद्वान् अथवा वेदान्तसे भी अतीत। ३२ वेदात्मा—वेदस्वरूप। ३३ भवबन्धैकभेषजः—संसारबन्धनसे मुक्त करनेके लिये एकमात्र औषधरूप। ३४ दूषणत्रिशिरोऽरिः—दूषण और त्रिशिरा नामक राक्षसोंके शत्रु। ३५ त्रिमूर्तिः—ब्रह्मा, विष्णु और शिव—तीन रूप धारण करनेवाले। ३६ त्रिगुणः—त्रिगुणस्वरूप अथवा तीनों गुणोंके आश्रय। ३७ त्रयी—तीन वेदस्वरूप। ३८ त्रिविक्रमः—वामन अवतारमें तीन पगोंसे समस्त त्रिलोकीको नाप लेनेवाले। ३९ त्रिलोकात्मा—तीनों लोकोंके आत्मा। ४० पुण्यचारित्रकीर्तनः—जिनकी लीलाओंका कीर्तन परम पवित्र है, ऐसे। ४१ त्रिलोकरक्षकः—तीनों लोकोंकी रक्षा करनेवाले। ४२ धन्वी—धनुष धारण करनेवाले। ४३ दण्डकारण्यवासकृत्—दण्डकारण्यमें निवास करनेवाले। ४४ अहल्यापावनः—अहल्याको पवित्र करनेवाले। ४५ पितृभक्तः—पिताके भक्त। ४६ वरप्रदः—वर देनेवाले। ४७ जितेन्द्रियः—इन्द्रियोंको काबूमें रखनेवाले। ४८ जितक्रोधः—क्रोधको जीतनेवाले। ४९ जितलोभः—लोभकी वृत्तिको परास्त करनेवाले। ५० जगद्गुरुः—अपने आदर्श चरित्रोंसे सम्पूर्ण जगत्‌को शिक्षा देनेके कारण सबके गुरु।

५१ ऋक्षवानरसंघाती—वानर और भालुओंकी सेनाका संगठन करनेवाले। ५२ चित्रकूट-समाश्रयः—वनवासके समय चित्रकूटपर्वतपर निवास करनेवाले। ५३ जयन्तत्राणवरदः—जयन्तके प्राणोंकी रक्षा करके उसे वर देनेवाले। ५४ सुमित्रापुत्र-सेवितः—सुमित्रानन्दन लक्ष्मणके द्वारा सेवित। ५५ सर्वदेवाधिदेवः—सम्पूर्ण देवताओंके भी अधिदेवता। ५६ मृतवानरजीवनः—मरे हुए वानरोंको जीवित करनेवाले। ५७ मायामारीचहन्ता—मायामय मृगका रूप धारण करके आये हुए मारीच नामक राक्षसका वध करनेवाले। ५८ महाभागः—महान् सौभाग्यशाली। ५९ महाभुजः—बड़ी-बड़ी बाँहोंवाले। ६० सर्वदेवस्तुतः—सम्पूर्ण देवता जिनकी स्तुति करते हैं, ऐसे। ६१ सौम्यः—शान्तस्वभाव। ६२ ब्रह्मण्यः—ब्राह्मणोंके हितैषी। ६३ मुनिसत्तमः—मुनियोंमें श्रेष्ठ। ६४ महायोगी—सम्पूर्ण योगोंके अधिष्ठान होनेके कारण महान् योगी। ६५ महोदारः—परम उदार। ६६ सुग्रीवस्थिर-राज्यदः—सुग्रीवको स्थिर राज्य प्रदान करनेवाले। ६७ सर्वपुण्याधिकफलः—समस्त पुण्योंके उत्कृष्ट फलरूप। ६८ स्मृतसर्वाघनाशनः—स्मरण करने-मात्रसे ही सम्पूर्ण पापोंका नाश करनेवाले। ६९ आदिपुरुषः—ब्रह्माजीको भी उत्पन्न करनेके कारण सबके आदिभूत अन्तर्यामी परमात्मा। ७० महापुरुषः—समस्त पुरुषोंमें महान्। ७१ परमः पुरुषः—सर्वोत्कृष्ट पुरुष। ७२ पुण्योदयः—पुण्यको प्रकट करनेवाले। ७३ महासारः—सर्वश्रेष्ठ सारभूत परमात्मा। ७४ पुराणपुरुषोत्तमः—पुराणप्रसिद्ध क्षर-अक्षर पुरुषोंसे श्रेष्ठ लीलापुरुषोत्तम। ७५ स्मितवक्त्रः—जिनके मुखपर सदा मुसकानकी छटा छायी रहती है, ऐसे। ७६ मितभाषी—कम बोलनेवाले। ७७ पूर्वभाषी—पूर्ववक्ता। ७८ राघवः—रघुकुलमें अवतीर्ण। ७९ अनन्तगुण-