पद्म पुराण

पद्म पुराण
Padma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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[ १२ ]
| विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|
| १५२-त्रिरात्र तुलसीव्रतकी विधि और महिमा | ६२१ |
| १५३-अन्नदान, जलदान, तड़ाग-निर्माण, वृक्षारोपण तथा सत्यभाषण आदिकी महिमा ...... | ६२३ |
| १५४-मन्दिरमें पुराणकी कथा कराने और सुपात्रको दान देनेसे होनेवाली सद्गतिके विषयमें एक आख्यान तथा गोपीचन्दनके तिलककी महिमा | ६२६ |
| १५५-संवत्सरदीप-व्रतकी विधि और महिमा | ६२८ |
| १५६-जयन्ती संज्ञावाली जन्माष्टमीके व्रत तथा विविध प्रकारके दान आदिकी महिमा ..... | ६३१ |
| १५७-महाराज दशरथका शनिको संतुष्ट करके लोकका कल्याण करना ............ | ६३५ |
| १५८-त्रिस्पृशाव्रतकी विधि और महिमा ....... | ६३७ |
| १५९-पक्षवर्धिनी एकादशी तथा जागरणका माहात्म्य | ६३९ |
| १६०-एकादशीके जया आदि भेद, नक्तव्रतका स्वरूप, एकादशीकी विधि, उत्पत्तिकथा और महिमाका वर्णन ................... | ६४३ |
| १६१-मार्गशीर्ष शुक्लपक्षकी 'मोक्षा' एकादशीका माहात्म्य ..................... | ६४७ |
| १६२-पौष मासकी 'सफला' और 'पुत्रदा' नामक एकादशीका माहात्म्य ............. | ६४९ |
| १६३-माघ मासकी 'षट्तिला' और 'जया' एकादशीका माहात्म्य ............. | ६५१ |
| १६४-फाल्गुन मासकी 'विजया' तथा 'आमलकी' एकादशीका माहात्म्य ............. | ६५३ |
| १६५-चैत्र मासकी 'पापमोचनी' तथा 'कामदा' एकादशीका माहात्म्य ............. | ६५८ |
| १६६-वैशाख मासकी 'वरूथिनी' और 'मोहिनी' एकादशीका माहात्म्य ............. | ६६० |
| १६७-ज्येष्ठ मासकी 'अपरा' तथा 'निर्जरा' एकादशीका माहात्म्य ............. | ६६२ |
| १६८-आषाढ़ मासकी 'योगिनी' और 'शयिनी' एकादशीका माहात्म्य ............. | ६६५ |
| १६९-श्रावण मासकी 'कामिका' और 'पुत्रदा' एकादशीका माहात्म्य ............. | ६६७ |
| १७०-भाद्रपद मासकी 'अजा' और 'पद्मा' एकादशीका माहात्म्य ............. | ६६९ |
| १७१-आश्विन मासकी 'इन्दिरा' और 'पापाङ्कुशा' एकादशीका माहात्म्य ............. | ६७१ |
| १७२-कार्तिक मासकी 'रमा' और 'प्रबोधिनी' एकादशीका माहात्म्य ............. | ६७४ |
| १७३-पुरुषोत्तम मासकी 'कमला' और 'कामदा' एकादशीका माहात्म्य ............. | ६७७ |
| १७४-चातुर्मास्य व्रतकी विधि और उद्यापन .... | ६८० |
| १७५-यमराजकी आराधना और गोपीचन्दनका माहात्म्य ................... | ६८४ |
| १७६-वैष्णवोंके लक्षण और महिमा तथा श्रवण-द्वादशी-व्रतकी विधि और माहात्म्य-कथा | ६८८ |
| १७७-नाम-कीर्तनकी महिमा तथा श्रीविष्णुसहस्रनाम-स्तोत्रका वर्णन .................. | ६९१ |
| १७८-गृहस्थ-आश्रमकी प्रशंसा तथा दान-धर्मकी महिमा ...................... | ७२४ |
| १७९-गण्डकी नदीका माहात्म्य तथा अभ्युदय एवं और्ध्वदैहिक नामक स्तोत्रका वर्णन ...... | ७२५ |
| १८०-ऋषिपञ्चमी-व्रतकी कथा, विधि और महिमा | ७२८ |
| १८१-न्याससहित अपामार्जन नामक स्तोत्र और उसकी महिमा ................. | ७३० |
| १८२-श्रीविष्णुकी महिमा—भक्तप्रवर पुण्डरीककी कथा ...................... | ७३५ |
| १८३-श्रीगङ्गाजीकी महिमा, वैष्णव पुरुषोंके लक्षण तथा श्रीविष्णु-प्रतिमाके पूजनका माहात्म्य .. | ७४२ |
| १८४-चैत्र और वैशाख मासके विशेष उत्सवका वर्णन, वैशाख, ज्येष्ठ और आषाढ़में जलस्थ श्रीहरिके पूजनका महत्त्व ........ | ७४५ |
| १८५-पवित्रारोपणकी विधि, महिमा तथा भिन्न-भिन्न मासमें श्रीहरिकी पूजामें काम आनेवाले विविध पुष्पोंका वर्णन .................. | ७४७ |
| १८६-कार्तिक-व्रतका माहात्म्य—गुणवतीको कार्तिकव्रतके पुण्यसे भगवान्की प्राप्ति ... | ७५० |
| १८७-कार्तिककी श्रेष्ठताके प्रसङ्गमें शङ्खासुरके वध, वेदोंके उद्धार तथा 'तीर्थराज'के उत्कर्षकी कथा | ७५३ |
| १८८-कार्तिक मासमें स्नान और पूजनकी विधि | ७५६ |
| १८९-कार्तिक-व्रतके नियम और उद्यापनकी विधि | ७५९ |
| १९०-कार्तिक-व्रतके पुण्यदानसे एक राक्षसीका उद्धार | ७६२ |
| १९१-कार्तिक-माहात्म्यके प्रसङ्गमें राजा चोल और विष्णुदासकी कथा ............. | ७६५ |