भारतकोश
पद्म पुराण

पद्म पुराण

Padma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
**१९२-**पुण्यात्माओंके संसर्गसे पुण्यकी प्राप्तिके प्रसङ्गमें धनेश्वर ब्राह्मणकी कथा $\dots\dots\dots\dots\dots$७६९**२१६-**श्रीमद्भगवद्गीताके नवें और दसवें अध्यायोंका माहात्म्य $\dots\dots\dots\dots\dots$८२८
**१९३-**अशक्तावस्थामें कार्तिक-व्रतके निर्वाहका उपाय७७३**२१७-**श्रीमद्भगवद्गीताके ग्यारहवें अध्यायका माहात्म्य८३२
**१९४-**कार्तिक मासका माहात्म्य और उसमें पालन करने योग्य नियम $\dots\dots\dots\dots\dots$७७४**२१८-**श्रीमद्भगवद्गीताके बारहवें अध्यायका माहात्म्य८३५
**१९५-**प्रसङ्गतः माघस्नानकी महिमा, शूकरक्षेत्रका माहात्म्य तथा मासोपवास-व्रतकी विधिका वर्णन७७७**२१९-**श्रीमद्भगवद्गीताके तेरहवें और चौदहवें अध्यायोंका माहात्म्य $\dots\dots\dots\dots\dots$८३७
**१९६-**शालग्रामशिलाके पूजनका माहात्म्य $\dots\dots\dots$७७८**२२०-**श्रीमद्भगवद्गीताके पंद्रहवें तथा सोलहवें अध्यायोंका माहात्म्य $\dots\dots\dots\dots\dots$८४०
**१९७-**भगवत्पूजन, दीपदान, यमतर्पण, दीपावली-कृत्य, गोवर्धन-पूजा और यमद्वितीयाके दिन करने योग्य कृत्योंका वर्णन $\dots\dots\dots\dots\dots$७८०**२२१-**श्रीमद्भगवद्गीताके सत्रहवें और अठारहवें अध्यायोंका माहात्म्य $\dots\dots\dots\dots\dots$८४२
**१९८-**प्रबोधिनी एकादशी और उसके जागरणका महत्त्व तथा भीष्मपञ्चक-व्रतकी विधि एवं महिमा७८२**२२२-**देवर्षि नारदकी सनकादिसे भेंट तथा नारदजीके द्वारा भक्ति, ज्ञान और वैराग्यके वृत्तान्तका वर्णन८४५
**१९९-**भक्तिका स्वरूप, शालग्रामशिलाकी महिमा तथा वैष्णव पुरुषोंका माहात्म्य $\dots\dots\dots\dots\dots$७८४**२२३-**भक्तिका कष्ट दूर करनेके लिये नारदजीका उद्योग और सनकादिके द्वारा उन्हें साधनकी प्राप्ति८४९
**२००-**भगवत्स्मरणका प्रकार, भक्तिकी महत्ता, भगवत्तत्त्वका ज्ञान, प्रारब्धकर्मकी प्रबलता तथा भक्तियोगका उत्कर्ष $\dots\dots\dots\dots\dots$७८६**२२४-**सनकादिद्वारा श्रीमद्भागवतकी महिमाका वर्णन तथा कथा-रससे पुष्ट होकर भक्ति, ज्ञान और वैराग्यका प्रकट होना $\dots\dots\dots\dots\dots$८५२
**२०१-**पुष्कर आदि तीर्थोंका वर्णन $\dots\dots\dots\dots\dots$७९०**२२५-**कथामें भगवान्का प्रादुर्भाव, आत्मदेव ब्राह्मणकी कथा—धुन्धुकारी और गोकर्णकी उत्पत्ति तथा आत्मदेवका वनगमन $\dots\dots\dots\dots\dots$८५६
**२०२-**वेत्रवती और साभ्रमती (साबरमती) नदीका माहात्म्य $\dots\dots\dots\dots\dots$७९१**२२६-**गोकर्णजीकी भागवत-कथासे धुन्धुकारीका प्रेतयोनिसे उद्धार तथा समस्त श्रोताओंको परमधामकी प्राप्ति $\dots\dots\dots\dots\dots$८६१
**२०३-**साभ्रमती नदीके अवान्तर तीर्थोंका वर्णन७९५**२२७-**श्रीमद्भागवतके सप्ताह-पारायणकी विधि तथा भागवत-माहात्म्यका उपसंहार $\dots\dots\dots\dots\dots$८६५
**२०४-**अग्नितीर्थ, हिरण्यसंगमतीर्थ, धर्मतीर्थ आदिकी महिमा $\dots\dots\dots\dots\dots$७९७**२२८-**यमुना-तटवर्ती 'इन्द्रप्रस्थ' नामक तीर्थकी माहात्म्य-कथा $\dots\dots\dots\dots\dots$८७०
**२०५-**साभ्रमती-तटके कपीश्वर, एकधार, सप्तधार और ब्रह्मवल्ली आदि तीर्थोंकी महिमाका वर्णन७९९**२२९-**निगमोद्बोध नामक तीर्थकी महिमा—शिवशर्माके पूर्वजन्मकी कथा $\dots\dots\dots\dots\dots$८७३
**२०६-**साभ्रमती-तटके बालार्क, दुर्धर्षेश्वर तथा खड्गधार आदि तीर्थोंकी महिमाका वर्णन $\dots$८०२**२३०-**देवल मुनिका शरभको राजा दिलीपकी कथा सुनाना—राजाको नन्दिनीकी सेवासे पुत्रकी प्राप्ति $\dots\dots\dots\dots\dots$८७५
**२०७-**वात्रघ्नी आदि तीर्थोंकी महिमा $\dots\dots\dots\dots\dots$८०६**२३१-**शरभको देवीकी आराधनासे पुत्रकी प्राप्ति; शिवशर्माके पूर्वजन्मकी कथाका और निगमोद्बोधक तीर्थकी महिमाका उपसंहार $\dots\dots$८७९
**२०८-**श्रीनृसिंहचतुर्दशीके व्रत तथा श्रीनृसिंहतीर्थकी महिमा $\dots\dots\dots\dots\dots$८१०**२३२-**इन्द्रप्रस्थके द्वारका, कोसिला, मधुवन, बदरी, हरिद्वार, पुष्कर, प्रयाग, काशी, काञ्ची और गोकर्ण आदि तीर्थोंका माहात्म्य $\dots\dots\dots\dots\dots$८८०
**२०९-**श्रीमद्भगवद्गीताके पहले अध्यायका माहात्म्य८१४
**२१०-**श्रीमद्भगवद्गीताके दूसरे अध्यायका माहात्म्य८१५
**२११-**श्रीमद्भगवद्गीताके तीसरे अध्यायका माहात्म्य८१७
**२१२-**श्रीमद्भगवद्गीताके चौथे अध्यायका माहात्म्य८२०
**२१३-**श्रीमद्भगवद्गीताके पाँचवें अध्यायका माहात्म्य८२२
**२१४-**श्रीमद्भगवद्गीताके छठे अध्यायका माहात्म्य८२३
**२१५-**श्रीमद्भगवद्गीताके सातवें तथा आठवें अध्यायोंका माहात्म्य८२५