पद्म पुराण

पद्म पुराण
Padma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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॥ श्रीहरिः ॥
विषय-सूची
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| सृष्टि-खण्ड | १९-नाना प्रकारके व्रत, स्नान और तर्पणकी विधि तथा अन्नादि पर्वतोंके दानकी प्रशंसामें राजा धर्ममूर्तिकी कथा ...................... | ७५ | |
| १-ग्रन्थका उपक्रम तथा इसके स्वरूपका परिचय | १ | २०-भीमद्वादशी-व्रतका विधान ............ | ८१ |
| २-भीष्म और पुलस्त्यका संवाद—सृष्टि-क्रमका वर्णन तथा भगवान् विष्णुकी महिमा ...... | ३ | २१-आदित्य-शयन और रोहिणी-चन्द्र-शयन-व्रत, तड़ागकी प्रतिष्ठा, वृक्षारोपणकी विधि तथा सौभाग्य-शयन-व्रतका वर्णन .......... | ८३ |
| ३-ब्रह्माजीकी आयु तथा युग आदिका कालमान, भगवान् वराहद्वारा पृथ्वीका रसातलसे उद्धार और ब्रह्माजीके द्वारा रचे हुए विविध सर्गोंका वर्णन ............................... | ६ | २२-तीर्थ-महिमाके प्रसङ्गमें वामन-अवतारकी कथा, भगवान्का बाष्कल दैत्यसे त्रिलोकीके राज्यका अपहरण ...................... | ९१ |
| ४-यज्ञके लिये ब्राह्मणादि वर्णों तथा अन्नकी सृष्टि, मरीचि आदि प्रजापति, रुद्र तथा स्वायम्भुव मनु आदिकी उत्पत्ति और उनकी संतान-परम्पराका वर्णन ....................... | १० | २३-सत्सङ्गके प्रभावसे पाँच प्रेतोंका उद्धार और पुष्कर तथा प्राची सरस्वतीका माहात्म्य ... | ९७ |
| ५-लक्ष्मीजीके प्रादुर्भावकी कथा, समुद्र-मन्थन और अमृत-प्राप्ति ..................... | १२ | २४-मार्कण्डेयजीके दीर्घायु होनेकी कथा और श्रीरामचन्द्रजीका लक्ष्मण और सीताके साथ पुष्करमें जाकर पिताका श्राद्ध करना तथा अजगन्ध शिवकी स्तुति करके लौटना ..... | १०२ |
| ६-सतीका देहत्याग और दक्ष-यज्ञ-विध्वंस ... | १४ | २५-ब्रह्माजीके यज्ञके ऋत्विजोंका वर्णन, सब देवताओंको ब्रह्माद्वारा वरदानकी प्राप्ति, श्रीविष्णु और श्रीशिवद्वारा ब्रह्माजीकी स्तुति तथा ब्रह्माजीके द्वारा भिन्न-भिन्न तीर्थोंमें अपने नामों और पुष्करकी महिमाका वर्णन ..... | १०९ |
| ७-देवता, दानव, गन्धर्व, नाग और राक्षसोंकी उत्पत्तिका वर्णन ...................... | १७ | २६-श्रीरामके द्वारा शम्बूकका वध और मरे हुए ब्राह्मण-बालकको जीवनकी प्राप्ति ...... | ११४ |
| ८-मरुद्गणोंकी उत्पत्ति, भिन्न-भिन्न समुदायके राजाओं तथा चौदह मन्वन्तरोंका वर्णन .... | १९ | २७-महर्षि अगस्त्यद्वारा राजा श्वेतके उद्धारकी कथा | ११६ |
| ९-पृथुके चरित्र तथा सूर्यवंशका वर्णन ...... | २२ | २८-दण्डकारण्यकी उत्पत्तिका वर्णन ......... | ११९ |
| १०-पितरों तथा श्राद्धके विभिन्न अङ्गोंका वर्णन | २६ | २९-श्रीरामका लङ्का, रामेश्वर, पुष्कर एवं मथुरा होते हुए गङ्गातटपर जाकर भगवान् श्रीवामनकी स्थापना करना ....................... | १२२ |
| ११-एकोद्दिष्ट आदि श्राद्धोंकी विधि तथा श्राद्धोपयोगी तीर्थोंका वर्णन ............ | ३२ | ३०-भगवान् श्रीनारायणकी महिमा, युगोंका परिचय, प्रलयके जलमें मार्कण्डेयजीको भगवान्के दर्शन तथा भगवान्की नाभिसे कमलकी उत्पत्ति ............................ | १३० |
| १२-चन्द्रमाकी उत्पत्ति तथा यदुवंश एवं सहस्रार्जुनके प्रभावका वर्णन .......... | ३७ | ३१-मधु-कैटभका वध तथा सृष्टि-परम्पराका वर्णन | १३३ |
| १३-यदुवंशके अन्तर्गत क्रोष्टु आदिके वंश तथा श्रीकृष्णावतारका वर्णन ............... | ३९ | ३२-तारकासुरके जन्मकी कथा, तारककी तपस्या, उसके द्वारा देवताओंकी पराजय और ब्रह्माजीका देवताओंको सान्त्वना देना ......... | १३४ |
| १४-पुष्कर तीर्थकी महिमा, वहाँ वास करनेवाले लोगोंके लिये नियम तथा आश्रम-धर्मका निरूपण ............................ | ४३ | ३३-पार्वतीका जन्म, मदन-दहन, पार्वतीकी तपस्या और उनका भगवान् शिवके साथ विवाह .. | १३८ |
| १५-पुष्कर क्षेत्रमें ब्रह्माजीका यज्ञ और सरस्वतीका प्राकट्य ........................... | ४९ | ||
| १६-सरस्वतीके नन्दा नाम पड़नेका इतिहास और उसका माहात्म्य ..................... | ५५ | ||
| १७-पुष्करका माहात्म्य, अगस्त्याश्रम तथा महर्षि अगस्त्यके प्रभावका वर्णन ............. | ६३ | ||
| १८-सप्तर्षि-आश्रमके प्रसङ्गमें सप्तर्षियोंके अलोभका वर्णन तथा ऋषियोंके मुखसे अन्नदान एवं दम आदि धर्मोंकी प्रशंसा ............. | ६९ |