पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[header] पद्मावत। ५२३ [/header]
बेगे होहु मोहिं मारहु, जन चालहु यह बात ॥ कहहिंसँवरि जेहि चाहेसिसँवरा। हमतुमकरहिं केतिकर भँवरा॥ कहेसि वही संवरों हर फेरा। मुयेजीत आहों जेहि केरा ॥ औ सुमिरों पद्मावत रामा। यहिजिवन्योछावरतेहिनामा ॥ रक्त की बूँद कया जब परहीं। पद्मावत पद्मावत कहहीं ॥ रहे तो बूँद बूँद महँ ठाँऊँ। परहुँ तो सोई लै लै नाऊँ ॥ रोम रोम तन तासो ओधो। सूतैहि सूत बेध जिवसोधो ॥ हाड़हिहाड़ शब्द सो होई। नस नस माँह उठै धुनिसोई ॥ दो० खाय बिरह गांताकर, गूद मांस किये हान। हों पुनि सांचा होयरहा, वहकी रूप समानाँ॥ योगिहि जबहिं गाढ़ै असपरा। महादेव कर आसन टरा ॥ औ हँसि पार्वती सो कहा। जानहुसूर गहन असगहा ॥ आज चढ़े गढ़ ऊपर तपी। राजैं गहा सूर तब छिपा ॥ जग देखेगा कौतुकै आजू। कीन्हें तपा मारे कहँ साजू ॥ पार्वती सुनि पाँयन परी। चलौ महेश देखें इक घरी ॥ भेष भाट भाटिन कर कीन्हा। औ हनुमन्तवीर सँगलीन्हा॥ आय गुसँ है देखन लागे। वहसूरति कस सती सभोंगे ॥ दो० कटकै असुझदेखके आपन, राजागर्व करेय। दईकीदिशाँ न देखे, वह काकहँ जयै देय ॥ आसन लिये रहा हो तपा। पद्मावत पद्मावत जपा ॥ मन समाध तासों धुन लांगी। जेहिदरशन कारण बैरागी ॥
जल्द १ चंदन २ जगह ३ बेधना ४ सुराख ५ आवाज़ ६ समाना ७ मुशकिल ८ सूर्य ९ योगी १० तमाशा ११ महादेवजी १२ छिपकर १३ सतीकी तरह क़ायम १४ फ़ौज १५ ग़रूर १६ ईश्वरकी तरफ़ १७ जीत १८॥