भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 123

१३२ पद्मावत । तुम कहँ पाटँ हिये² में साजा । अब तुम मोर दुहूँ जगराजा ॥ दो० जोरीजियहिं मिलगलरहै, मरहिं तोएकहिं दोउ । तुमपै जियनहोयकछु, मोजियहोयसोहोउ ॥ खण्डइक़ीसवां शूलीखण्डरतनसेन ॥ बाँधतपौ आनी जहँ शूरी । जुरेआय सब सिंहल पूरी ॥ पहिले गुरूदेय कहँ आना । देखरूप सब कोउ पछताना ॥ लोगकहें यहि होय न योगी । राजकुँवर कोउअहैवियोगीँ ॥ काहू लाग भयो है तपा । हिये सुम्राल केर मुखजपा ॥ जस मारे कहँ बाजा तूरूँ । शूरीदेख हँसा मन्मूरूँ ॥ चमके दशनँ भयो उजियारा । जो जहँ तहां वीज असमारा॥ योगी केर करो पै खोजूं । मंगे यहिहोय न राजा भोजू ॥ दो० सब पूँछहिं कहु योगी, जात जन्म औ नाउ । जहाँ ठाँव रावकर, हँसा सो कहु केहिभाउ ॥ का पूँछौ अब जात हमारी । हम योगी औ तपा भिखारी ॥ योगी जात कौन हो राजा । गारिन कोहमोरैं नहिं लाजा ॥ निलज भिखारलाजजेहिं खोई । तेहिकी खोज परै जन कोई ॥ जाकर जीव मरे पर बसा । शूरीदेख सो कसनहिं हँसा ॥ आज नेहसों होय निबेरौँ । आजभूमि¹⁴ तजें गगनें बसेरा॥ आज कर्या पिंजर बँद टूटा । आजहिं प्रान परेवां छूटा ॥ आज नेह सो होय नियारा । आज प्रेमसँग चला पियारा ॥ दो० आजअबध सरै पहुँची, गयेजाउँमुखराँते । तख़्त-१ दिल २-५-योगी ३ दुखी ४ नामवाजा ६ नाम मर्द कामिल ७ दांत ८ बिजुली ९ तलाश १० शायद ११ गुस्सा १२ जुदाई १३-१६ ज़मीन १४ छोड़ना १५ आसमान १६ चढ़न १७ उड़नेवाला १८ हद २० बराबर २१ लाल २२ ॥