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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 122

रहै तो करौं जन्म भर सेवा । चलैतो यह जिव साथ परेवा ॥ कौनसो करं लैगहि गुरुसोई । पर कायां प्रवेश जो होई ॥ पलटसो कौन पंथै बिधिकेला । चेला गुरु गुरु होय चेला ॥ कौन खण्ड अस रहा लुकाई । आवै काल हेरै फिर जाई ॥ दो० चेला सिद्ध सो पावै, गुरुसों करैअछेद । गुरु करै जो कृपा, कहै सो चेला भेद ॥ अनरानी तुम गुरु वह चेला । मोहिं पूँछहु कै सिद्ध नवेला ॥ तुम चेला कहँ परशन भई । दरशन देय मँडफ चलगई ॥ रूप गुरू कर चेलहि दीठा । जितसमायहोयचित्रं सोपैठा ॥ जीव काढ़ लै तुम अपसई । वह भा काया जिव तुम भई ॥ क्या जो लाग धूप औ सेऊँ । क्या न जान जानि पै जीऊ ॥ भोग तुम्हार मिला वह जाई । जो वहबिथा सोतुम कहँआई ॥ तुम चहकी घट वह तुम माहां । काल कहां पावै वह छाहां ॥ दो० अस वह योगी अमरै भा, परकाया परबेश । आवकाल गुरु तनदेखी, फिर सोकरै अदेश ॥ सुनि योगी की आमर करनी । न्योरी बिरहबिथाकीमरनी ॥ कमलकरीहोय बिकसो जीव । जनु रविउदय छूटगासीवैं ॥ जो भा सिद्धको मारै पारा । नींबूरसते होय जो बारों ॥ कहो जाय अब मोर सँदेशू । तजो योगअबहोहु नरेशू ॥ जन जानहु हौं तुमसों दूरी । नयनहिं मांझ गड़ी वहशूरी ॥ तुम सँचेत घटै घट केरा । मोहिंघटजीव घटननहिंबेरा ॥


पाद-टिप्पणी (Footnotes): १ हाथ १ पकड़ना २ यत्न ३ राह ४ देखना ५-६ कमाल ६ दुई न राखै ७ नया ८ तसवीर १० छिपना ११ जाड़ा १२ हमेशा ज़िन्दा १३ सलाम १४ आख़िर १५ खिलना १६ सूर्यके उदय जाड़ा जाय १७ राख १८ छोड़ना १६ बहादुर २० पसीना २१ देर २२ ॥