पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 126, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ें। पद्मावत । १२५ बोला गन्ध्रबसेन रिसाई। कैस योगि कस भांट असीई ॥ योगी पानि आग तू राजा। आगहि पानि जूझ नहिं छाजा ॥ दो० आग बुझाई पानि सो, जूझ न राजा बूझ। लीन्हे खप्पर बारै तुहिं, भिक्षा देहि न जूझ ॥ योगि न होय आहि सो मोंजू। जानहु भेद करो सो खोजू ॥ भारथे होय जूझै जो ओधा। होहिं सहाय आय सब योधा ॥ महादेव रण घण्ट बजावा। सुनिकै शब्दे ब्रह्म चलि आवा ॥ वासुकि फण पतार सों काढ़ा। अष्टोकली नाग भा ठाढ़ा ॥ छप्पन कोटि बसन्देरं बरा। सवालाख पर्वत फुरहरौ ॥ चढ़े अस्त्र लै कृष्ण मुरारी। इन्द्र लोग सब लाग गुहारी ॥ तेंतिस कोटि देवता साजा। औ छानबे मेघदल गाजा ॥ दो० नव्वे नाथ चलि आवहिं, औ चौरासी सिद्ध। आज महाभारत चलै, गगनैं गरुड़ै औ गिद्ध ॥ भइ अजौ को भाट औ भारूँ। बायें हाथ दिये बरभारूँ ॥ को योगी अस नगरी मोरै। जो दै सेंध चढ़े गढ़ चोरै ॥ इन्द्र डरै नित नावै माथा। जानत कृष्ण शेष जे नाथा ॥ ब्रह्मा डरै चतुरमुख जासू। औ पाताल डरै बलि बासू ॥ धरति डरै औ मण्डफ मेरू। चन्द्र सूर्य्य औ गगनैं गँभीरू ॥ मेघ डरहिं बिजुली जेहि डीठी। कूर्म डरै धरती जेहिं पीठो ॥ चहोंतो सबमोंकों धर केशा। और को गिनेतैं अनेग नरेशाँ ॥
- बेंअदब १-१६ लड़ाई २ दरवाज़ा ३ भारी लड़ाई ४ मारना ५ मदद ६ आवाज़ ७ नाम राजा साँपों का ८-२० नाम हाथी ९ आग १० मौजूद ११ हथियार १२ आसमान १३ नाम राजा पक्षी १४ हुक्म १५ सलाम १७ चार मुँह १८ राजा दैत्य १६ नाम पहाड़ २१ आसमान २२ निगाह २३ कछुवा २४ फेरुआ देना २५ गिनती २६ राजा २७ ॥