पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 127, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ें१२६ | पद्मावत । दो० बोला भाट नरेश सुनि, गर्व न छाजा जीव । कुम्भकरणकी खोपड़ी, बूडत बाचों भीवँ ॥ रावण गर्व बिरोधों रामू । ओही गर्व भयो संग्रामू ॥ तसरावण असको बरबंडा । जेहिदशशीशँ बीसभुजदंडा ॥ सूरज जेहि की तपै रसोई । निज बसन्दर धोती धोई ॥ मूर्क मुनेटाँ शशिमसयारों । पवनैं करैनित बोरै बोहारा ॥ मीचैं लाये कै पादी बांधा । रहा न दूसर सपने कांधा ॥ जो अस बज्र टरहि नहिं टारा । सोउ मर दोउ तपेंसी करमारा ॥ नाती पूत कोटि दश अहा । रोवनहार न एको रहा ॥ दो० ओझ जान के काहू, जनकोइ गर्व करेय । ओछी पार दई है, जीत पत्र जो देय ॥ अबजो भाट तहां हंत आगे । बिनयें उठा राजा रिसलागे ॥ भाट अह्रै ईश्वर की कला । राजा सबराकैं अरकला ॥ भाट मीच पै आपन दीसा । ताकहँ कौन करै रिस रीसा ॥ भयो रजाये सुगन्ध्रब सेनी । काहिं मीचके चढ़ा नसेनी ॥ कह अनी बानी अस पढ़े । करसि न बुद्धे भेंट जो कढ़े ॥ जातभाट कितऔगुन लावस । बायें हाथँ राजबर भावसैं ॥ भाट नाउँ का मारों जीवा । अबहूं बोल नायके ग्रीवां ॥ दो० तुइरे भाट वै योगी, तोहि यह कहांक सङ्ग । कहां चढ़ै असपावा, कहां भया चित भङ्ग ॥
- ग़रूर १ वचना २ नाम पहलवान ३ सज़ादेना ४ लड़ाई ५ ज़बरदस्त ६ शिर ७ नाम गुरु राक्षसोंका ८ चोबदार ६ चाँद मशालची १० हवा ११ दरवाज़ा १२ मौत १३ श्रीराम लक्ष्मण १४ ग़रूर १५ कमज़ोर की तरफ़ १६ अर्ज़ १७ मुकाबिला न चाही १८ हुक्म १६ सीढ़ी २० अक़्ल २१ बेहुनर २२ सलाम २३ गर्दन २४ ॥