पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। १२७ जो सत पूँछेसि गन्ध्रब राजा। सत पै कहूँ परे नहिं गाजा ॥ भाटहि काहि मीचसों डरना। हाथ कटार पेट हन मरना ॥ जम्बूद्वीप चितावर देशू । चित्रसेन बड़ तहां नरेशू ॥ रतनसेन यहि तांकर बेटा। कुल चौहान जाय नहिं मेटा ॥ खांडेअंचल सुमेरु सुभारू । टरै न जो लागै संसारू ॥ दान सुमेरु देत नहिं खांगो। जो यह मांग न औरहि मांगा ॥ दाहिन हाथ उठायों ताही। और को अस वरभावो जाही ॥ दो० नाउँ महापात्र गुहिं, तेहेकि भिखारी डीठँ । रिसलागे खरिवात कहि, खरि पै कहै वसीठँ ॥ ततखनं सुनि महेश मनलाजा। भाटकिरंनि है विनवां राजा ॥ गन्ध्रबसेन तू राजा महां। हों महेश मूरत सुनि कहा ॥ पै जो बात होय भल आगे। कहा चही काभा रिस लागे ॥ राजकुँवर यहिहोहिं न योगी। सुनि पद्मावत भयो वियोगी ॥ जम्बूद्वीप राजघर बेटा। जोहै लिखा सो जाय न मेटा ॥ तूरै सुवै जाय वह आना। औ जाकर बिरोकै तैमाना ॥ पुनि यह बात सुनीशिवलोका। कर सुविवाह धर्म है तोका ॥ दो० मांग भीख खप्पर लिये, मुये न छांड़ै बौरै। चूमदेखजो कनककचौरी, भीखदेह नहिंमार ॥ औ हेंट होहरे भाट भिखारी। का तू मोहिं देइ अस गारी ॥ को मोहियोगीं जगतहोइपारा। जासों हेरों जाय पतारा ॥ योगी यती आव जित कोई। सुनत त्रासे मान भा सोई ॥ बिजुली १, राजा २ तलवार बहादुर ३ कमी ४ शोख ५ वकील ६ उसी वक्त ७ महादेवजी ८ मानिन्द ९ तारीफ़ १० कहामान ११ दुःखी १२ गुस्सा १३ दरवाज़ा १४ सोने की कटोरी १५ दूर हो १६ लायक १७ देखना १८ डर १६ ॥