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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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बहुतक भुवन सोह अत्रीखा। रहे जो लाख भये ते लेखा ॥ दो० बहुतक परे समुद्रमहँ, परत न पावां खोज। जहां गर्व तहँ पीरा, जहां हँसी तहँ रोजै ॥ फिर आगे का देखे राजा। ईश्वर केर घ्रंट रण बाजा ॥ सुना शंख जो विष्णु अपूरा। आगे हनुमत केर लँगूरा ॥ लीन्हें फिरै लोक ब्रह्माण्डा। स्वर्ग पतारलोवा म़तमण्डाँ ॥ बलि बासुकि औ इन्द्रनरेन्दू। राहु नखत सूरज औ चन्दू ॥ जामवन्त दानव राक्षस पूरे। अहंतो बह्न आय रण जुरे ॥ जेहिकर गर्व करत हत राजा। सो सब फिरि बैरी होइ साजा ॥ जहँवां महादेव रण खड़ा। शीश नाय नृप पांयन पड़ा ॥ दो० केहिकारणे रिसकीजिये, हौं सेवक औ चेर। जेहिचाही तेहि दीजिये, बारि गुसाई केर ॥ जब महेश उठ कीन्हवसीठी। पहिले कडू अन्तहोय मीठी ॥ तू गन्ध्रब राजा जग पूजा। गुण चौदह सिख देइको दूजा॥ हीरामन जो तुम्हार परेवां। गा चितौर औ कीन्हेसि सेवा ॥ तेहि बुलाय पूँछौ वह देशू। औ पूँछौ योगिहि जस बेशू ॥ हमरे कहत रोप नहिं मानो। जो वह कहै सोई परमानो ॥ जहां बारितहँ आववर ओका। कर विवाह धर्म बड़ तोका ॥ जौ पहिले मन माननकांधे। परखै रतन गांठ तब बांधे ॥ दो० रतन छिपाये ना छिपै, पारख होय सो पेष। बाल कसौटी दीजिये, कनक कचोरी वेष ॥


१ फिरना २ बीच ३ मगर ३-११ रोना ४ महादेव जी ५-१५ जमीन ६ नाम राजा दैत्य ७ नाम राजी सांप ८ राजा ६-१२ पत्थर १० वास्ते १३ लड़की १४ वकालत १६ जानवर परिन्द १७ यकीन १८ सोने की कटोरी १६॥