पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३० पद्मावत । हीरामन जो राजैं सुना । रोषे¹ बुझाय हिये² महँ गुना ॥ आज्ञाभई बोलावहु सोई । पण्डितहूते दोषै³ नहिं होई ॥ एक कहत सहसर्कै⁴ दशधाये । हीरामनहिं वेग लै आये ॥ खोला आगे आन मँजूसाँ⁵ । मिलानिकसिबहुदिनकररूसा॥ अस्तुति करत मिला बहुभांती⁶ । राजैं सुना हिये भइ शांती⁷ ॥ जानौं जरत अगिन जलपरा । होयफुलवाररहस हियभरा ॥ राजैं मिल पूँछी हँस बाता । कसतन पियर वरन मुखराताँ⁸ ॥ दो० चतुरबेदतुम पण्डित, पढ़े शास्त्र वो वेद । कहां चढ़े योगीगढ़, आन कीन्ह घर भेद ॥ हीरामन रसनाँ रस खोला । दैअशीश औ अस्तुति बोला ॥ इन्द्रराज राजेश्वर महा । सुनिहियैं रिसकुछ जाय न कहा॥ पै जो बात होय भल आगे । सेवक निडर कहै रिस लागे ॥ सुवा सुफल अमृत पैखोजा । होय न विक्रमें राजा भोजा ॥ हौं सेवक तुम आदि गुसांई । सेवा करों जियों जब तांई ॥ जो जिव दीन्ह देखावा देशू । सोपै जिय महँ बसै नरेशू ॥ जो वह सँवरै एकै तोहीं । सोई पंख जगत रतिमोहीं ॥ दो० नयन बैन औ श्रवण, सबही तोर प्रसाद । सेवा मोर यही नित, बोलों आशिरबाद ॥ जो अस सेवक जेहि तपँकसा । तेहिक जीभ पै अमृत वसा ॥ तेहिं सेवक कै करमहिं दोषू । सेवा करत करै पतिरोषू ॥ औ जेहिदोष निदोषहिं लागा । सेवक डरा जीव लै भागा ॥ गुस्सा १-१६ दिल २-११ क़सूर ३-१८ हज़ार ४ पिंजरा ५ बहुत तरह ६ तसल्ली ७ लाल ८ चार ६ ज़बान १० राजा विक्रमादित्य १२ सबसे पहिले १३ राजा १४ लालमुँह १५ आँख ज़बान कान १६ मेहनत की १७ बेक़सूर २० ॥