पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। १३१ जो पक्षी कहवां थिरै रहना। ताकै जहां जाय जो डहनाँ ॥ सप्तदीपँ फिर देखेउँ राजा। जम्बूदीप जाय तब बाजाँ ॥ तहँ चित्तौर देखो गढ़ ऊँचा। ऊँचराज शिर तोपहँ पहुँचा ॥ रतनसेन यह तहां नरेशू। सो आन्यो योगी कर बेशू ॥ दो० सुवासुफल लै आनी, है तेहि गुण मुखरातैं। कयाँ पीत सो तासों, सँवरौं बिक्रम बात ॥ पहिले भयो भाट सत भाखी। पुनि बोला हीरामन साखी ॥ राजा भा निश्चयें मन माना। बांधा रतन छोड़ कै आना ॥ कुल पूँछा चौहान कुलीना। रतन न बांधे होय मलीना ॥ हीरा दशन पान रँग पागी। विहँसत बदन बीजब्रतागी ॥ मुन्द्रा श्रवणँबीन सों चांपे। राजबैनँ उघरे सब झांपे ॥ आना काठर एक तुखारूँ। कहा सुफेरिभयो असवारू ॥ फेरा तुरी छतीसो खुरी। सबहिं बखानी सिंहलपुरी ॥ दो० कुँवर बतीसो लक्षना, सहसैं किरन जस भानैं। काह कसौटी कसिये, कञ्चैन बारह बान ॥ देख सूर्य्य करकमलँ सँयोगू। अस्तँअस्त बोला सबलोगू ॥ मिला सोवंश अंश उजियारा। भाविरोकं औ तिलक सँवारा ॥ अनिरुद्धको जो लिखजयमारा। को मेटै बाणासुर हारा ॥ आज मिलीअनिरुधकहूँ ऊपा। देव इन्द्र दीन्ह शिर दूषा ॥ खड्ग मूर भुइँ सरवरे केवा। वन खंड भँवरहोय रसलेवा ॥ क़ायम १ बाजू २ सातों मुल्क ३ पहुँचा ४ लाल ५ वदन ६ यक़ीन ७ कानकी बाली ८ सरदारी की बातें ६ घोड़ा १०-११ तारीफ़ १२ हज़ार १३ सूर्य्य १४-२० सोनाख़ालिस १५ तथा रतनसेन १६ तथा पद्मावत के लायक़ १७ इष्ट चाह १८ टीका १६ तालाब २१ ॥