पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३२ पद्मावत । पच्छिम का बार पूर्बकी बारी । लिखी जो जोरी होयनन्यारी ॥ मानुषसाज लाख मन साजा । सोई होयजो बिधिउपराजा ॥ दो० गये बाजन जो बा जंत, जिय मारण रणमाहँ । फिर बाजन ते बाजे, मंगलचार उनाहँ ॥ बोल गुसाईं कर मैं माना । कहिसोजगतउतरे कहँआना ॥ मानाबोल हर्ष जिव बाढ़ा । औ बिरोकैं भा टीका गाढ़ा ॥ दोनों मिले मनावा भला । पुरुष आप आप कहँ चला ॥ लीन्ह उतारी जो हत योगू । जो तप करै सो पावै भोगू ॥ वह मन चित जो एकै अहा । मार लीन्ह न दूसर कहा ॥ जो अस कोई जिव परछैंवा । देवता आय करहिं तेहिसेवा ॥ दिनदश जीवन जो दुख देखा । भायुगयुगसुख जहानलेखा ॥ दो० रतनसेन का बरनों, पद्मावत कर व्याह । मन्दिरबेगि सँवारो, मन्दिर तोरा छाह ॥ खण्डबाईसवां ब्याह राजारतनसेनऔरपद्मावत ॥ लगन धरी औ रचा बिवाहू । सिंहल निवत फिरा सबकाहू ॥ बाजन बाजे कोटि पचासा । भा आनंद सगरे कैलासा ॥ जेहिदिनकानितदेवमनावा । सोई दिवसे पद्मावत पावा ॥ चांद सूर्य्य मन माथे भागू । औगावहिंसबनखेंत सुहागू ॥ रचरचमाणिकै माड़ौ छावहिं। औभुइँराति १४ बिछावबिछावहिं॥ चन्दन खम्भ रचे चहुँ पांती । माणिकदिया बरहिंदिनराती ॥ घर घर मन्दिर रचे दुवारा । जहँतक नगर गीत झंकारा ॥ . लड़का १ लड़की २ अलग ३ ईश्वरने पैदाकिया ४ जमाव ५ खुशी ६ टीका ७ खेलना ८ तारीफ़ करना ९ जल्द १० दिन ११ तथा सहेलियां १२ जवाहर १३ लाल १४ ॥