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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 134

पद्मावत । १३३ दो० हाट बाट सब सिंहल, जहाँ देखी तहँ राते । धन रानी पद्मावत, जाकर ऐसि बरात ॥ रतनसेन कहँ कपड़ा आये । हीरा मोति पँदारथ लाये ॥ कुँवर सहसँ संग अहे सभागे । बिनयै करैं राजा पहँ लागे ॥ जेहिलग तुम साधा तप योगू । लेहु राज मानो सुख भोगू ॥ मज्जनें करहु बिभूति उतारो । करो अस्नानचित्रे समसारो ॥ काढ़हु मुन्द्रा फटक अभाऊ । पहिरो कुण्डल कनकॅजड़ाऊ ॥ छोरहु जटा फुलायल लेहू । झारहु केश मुकुट शिरदेहू ॥ काढ़हु कंथौ चिरकुट लावा । पहिरो राता दगला सुहावा ॥ दो० पांवरि तजहु देहुपगपैरी, आवा बांक तुखारं । बांध मौर धरि छत्र शिर, वेगेँ होहु असवार ॥ साजा राजा बाजन बाजे । मदनसहाय दोउदल गाजे ॥ औ राँता सोने रथ साजा । भई बरात गोहेन सब राजा ॥ बाजत गाजत भा असवारा । सब सिंहलने कीन्ह जुहारों ॥ चहुँदिशियश अलखततँरोई । सूरज चढ़ा चांद की ताई ॥ सब दिन तपे जैस हिये माहां । तैसि रात पाई सुख छाहां ॥ ऊपर छत्र राति तस छावा । इन्द्रलोक सब सेवा आवा ॥ आज इन्द्रअप्सर सौं मिला । सब कैलास होहिं सिंहला ॥ दो० धरती स्वर्ग चहुँ दिश, पूररही मशयार । बाजत आवै मंदिर कहँ, होहिं मंगलाचार ॥ पद्मावत धौराहरँ चढ़ी । धौकसरवि जाकहँशशि करी॥ लाल १-१२-१७ हज़ार २ अर्ज़ ३ नहाना ४ तसवीर ५ वाली नाचीज़ ६ सोना ७ गुदड़ी ८ खड़ाऊं ९ घोड़ा १० जल्द ११ साथ १३ सलाम १४: छोटे सितारे १५ दिल १६ इन्द्रलोक की परी १७ आसमान १८ महल २० सूर्य २१ चांद २२ ॥