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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 135

१३४ पद्मावत । देख बरात सखिनसों कहा। यह महँ कौनसो योगी अहा॥ कैसो योग लै ओरै निवाहा। भयो सूरै चढ़चांद बिवाहा॥ कौन सिद्धसो ऐसो अकेला। जे शिर लाय प्रेमसो खेला॥ कासों पिता बचन असहारी। उतरै न दीन्हदीन्हतेहि वौरी॥ काकहँ दई ऐसो जिव दीन्हा। जे जिहमार जीत रण लीन्हा॥ धन पूरुष अस नवै न नाये। औसैं परसहो देश पराये॥ दो० को बरबन्द वीर अस, मोहिं देखे कर चावँ। पुनिजायहिजनवासहि, सखीरी वेगैं देखाव॥ सखी देखावहिं चमकहिं वाहू। तू जसचांद सूर्य्य तोरनाहूँ॥ छिपा न रहै सूर्य्य परकाशू। देखकमलमन भयो विकाशू॥ वह उजियार जगत उपराहीं। जगउजियारसो तेहिपरछाहीं॥ जस रवि११. देखउठै परभातों। उठा छत्र देखहिं सब राता॥ वही मांझ भा दूलह सोई। और बरात संग सब कोई॥ सहसैंहिं१३ किरणरूपविधि१४ गढ़ा। सोने के रथ आवै चढ़ा॥ मन माथे दरशन उजियारा। सौंहैं निरखनहिंजायनिहारा॥ दो० रूपवन्त जस दरपण, धन तू जाकर कन्त। चाही जैसो मनोहरा, मिलासो मनभावन्त॥ देखा चांद सूर्य्य जस साजा। सहसैंहिं भावमदैनतनगाजा॥ हुलसे नयन दरश मदमाते। हुलसे अधरैं रंग रस राते॥ हुलसा बदनै ऊपररवि२० आई। हुलसाहियों कंचुकि२२ नसमाई॥ हुलसे कुंचैं कसनी बँद टूटी। हुलसेभुजबैलियों कर फूटी॥ आखिरतक १ सूर्य्य २-११-२० जवाब ३ लड़की ४ इतमीनान ५ ज़बर्दस्त ६ चाह ७ जल्द ८ ख़ाविन्द ९ खिलना १० भोर १२ हज़ार १३- १६ ईश्वर १४ सामने देखना १५ काम पैदा हुआ १७ होंठ १८ मुँह १६ दिल २१ अँगिया २२ छाती २३ चूड़ी २४॥