भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 139

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१३८ पद्मावत। होय अनमद जूझ सो करिये। जान वेद आंकुश शिरधरिये॥ योगी होय नाद सो सुना। जेहि सुनि कामजरै चौगुना॥ किये जो परसै तन्त मनलांवा। घूम सांत सुनि और न भांवा॥ गये जो धर्म्म पन्थ है राजा। ताकहँ पुनि जो सुनै तो बाजाँ॥ दो० जस मदपियें घूम कोउ, नाद सुनै पै घूम। तेहिते बरजे नेकहै, चढ़ै रहसें के दूम॥ भई ज्योनाार फिरा खड़वाँनी। फिरा अरगंजा कुहकहँवानी॥ फेरे पान फिरा सब कोई। लाग्यो व्याहचार सब होई॥ माड़ो सोन कि गगन सँवारा। वन्दनवार लाग सब बाराँ॥ सजा पार्ट छत्र के छाहां। रतनै चौक पूरी तेहि मांहां॥ कंचने कलश नीर भरिधरा। इन्द्रे पास आनी अपसरों॥ गांठ दुलहिन दूलहकी जोरी। दुहूँ जगत जो जाय न छोरी॥ वेद पढ़ै पण्डित तेहि ठाऊँ। कन्या तुला राशि लै नाऊँ॥ दो० चांद सूर्य दोउ निरमलै, दोउसे योग अनूप। सूर्य चाँद सो मूला, चांद सूर्य के रूप॥ दोहूँ नाउँ लै गावहिं वारी। करहिं सो पद्मिनी मंगलचारा॥ चाँद के हाथ दीन्ह जयमाला। चांद आन सूर्य गरेँ घाला॥ सूरज लीन्ह चांद पहिराई। हार नखतै नेरहिं सो पाई॥ पुनि धनै भर अंजुल जल लीन्हा। यौवन जन्म कंत कहँ दीन्हा॥ कन्त लीन्ह दीन्हों धन हाथा। जोरी गांठ दुहूँ इक साथा॥ १ मेहनत २ राह ३ तारीफ़ ३ राग सुननेसे दूनी कैफ़ियत होती है ४ शरबत ५ अतर ६ आसमान ७ दरवाज़ा ८ तख़्त ६ जवाहिरात १० सोना ११ पानी १२ तथा राजा १३-१७ तथा पद्मावत १४-१८ पाकसाफ़ १५ मिलना १६ लड़की १६ पद्मावत २०-२४ सूरय तथा रतनसेन २१ गरदन २२ तथा सहेलियां २३॥