पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 138, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंसब कुँवरन पुनि खैंचा हाथू। ठाकुर जेवैं तो जेवैं साथू ॥ बिनय करहिं पण्डित बिचवाना। काहे नहिं जेवहिं यजमाना॥ वह कैलास इन्द्र कर बासू। जहां न अन्न न माछर मांसू ॥ पान फूल ओछी सब कोई। तुमकारणे यह कीन्ह रसोई ॥ भूख तर्जन १ अमृत है सूखा। धूपतो सीरकैं २ नींबी रूखा ॥ नींदतो सुइँ जनु सेज सैपेती ३। छांड़ो का चतुराई येती ॥ दो० कौन काज केहि कारण, बिकल भयो यजमान। होय रजायसुं ४ सोई, बेगि देहिं हम आन ॥ तुम पण्डित जानहु सब भेदू। पहिले नाद भयो तब बेदू ॥ आदि पिता ५ जो बिधि अवतारा। नादसंग जिवं ज्ञान सँचारा ॥ सो तुम बरजै नेकका कीन्हा। जेवन संग भोग बिधि दीन्हा ॥ नयनैं बैन नासक दुइश्रवना। यहिचारहुँ सँग जेवनश्रवना॥ जेवन देखा नयन सिरानी। जीभहिस्वादमुकै रसजानी ॥ नासक सबै बासना पाई। श्रवनहिका सँवरत पहुनाई ॥ तेहिं का होय नाद पै पोषौ १०। तब चारहुँ कर होय सँतोषौ ॥ दो० औ सब सुनहुँ शब्द इक, जिनहिं पड़ा कुछ सूझ। नाद सुननि पण्डित बरज, कहो सो तुमकाबूझ ॥ राजा उतरै सुनहु अब सोई। महि १७ डोलै जो बेद न होई ॥ नाद वेद मर्द पैंड़े २० जो बारी। काँयों महँते लेहु बिचारी ॥ नाद हिये २२ मन उपजी कायौं। जहँमदतहां पैंड़े नहिं छाया ॥ खुराक १-१३ वास्ते २ छोड़ना ३ ठण्डा रहे धूप लगने पर भी ४ सफ़ेद बिछौना ५ हुक्म ६ जल्द ७ ब्रह्मा ८ ईश्वर ६ बदन में जानआई १० रोक ११ आंख मुँह नाक कान १२ आसुदगी १४ क़रार १५ बात १६ जवाब १७ ज़मीन १८ मस्ती १६ शरीयत २०-२४ चदन २१-२३ दिल २२ ॥