पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९३६ पद्मावत । दो० आज इन्द्रहोय आयोँ, मैं बरात कैलाश १ आज मिली मोहिं अप्सरा, पूजी मन की आश ॥ होय लाग ज्योनार पसारा। कनक पत्र परसे पनवारा ॥ सोन थार मणि माणिक जरे। राये रङ्क सब आगे धरे ॥ रतन जड़ाऊ खोरौखोरी। जन जन आगे सौ सौ जोरी ॥ गडुवन हीरे पदारथ लागे। देख विमोहे पुरुष सभागे ॥ जानहुँ नखत करहिं उजियारा। छिप गये दीपक औ मसयारा ॥ भइमिल चाँद सूर्य की कला। भा उदोत तैसी निरमला ॥ जेहिं मानुष कहँ ज्योति न होती। तेहि भइ ज्योति देख वह ज्योती ॥ दो० पांति पांति सब बैठी, भांति भांति ज्योनार । कनक पत्र दोने तरे, कनक पत्र पनवार ॥ पहिले भात परोसे आना। जनहुँ सुवास कपूर बसाना ॥ बालहिं माड़ा औ घी पोई। उजियर देख पाप गयो धोई ॥ लुचई पूरी सुहारी पूरी। एक तो ताती औ सुठ कँवरी ॥ खंडरा खांड़ जो खण्डे खण्डे। बरी अकोतर सो कहँ हण्डे ॥ पुनि सँधाने आने बहु सांधी। दूध दही कि सुरन्दों बांधी ॥ पुनि बांवन प्रकार जो आये। नहिं अस देख न कबहूँ खाये ॥ पुनि जाँवरे पीफावरे आई। घृत खांड़ का कहौं मिठाई ॥ दो० जेवँत अधिक सुवासिक, मुहँ महँ परत विलाय । सहसै स्वाद सो पावै, एक कौर जो खाय ॥ जेवन आवा बीन न बाजा। बिनु बाजहिं नहिं जेवैं राजा॥ इन्द्रपुरी १ सोना २-८ राजाको भाई ३ कटोरा कटोरी ४ रोशनी ५ साफ़ ६ रौनक़ ७ बारीक माड़ी ६ एक क़िस्म का खाना १० अचार बहुत तरह का ११ लड्डुवा १२ खीर १३ मुरब्बा १४ हज़ार १५ ॥