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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पद्मावत। १३ जम्बू दीप कहूँ तस नाईं। लङ्कदीप संरपोच न भाई ॥ दीपगुस सहल आरण परा। दीपमहो सिंहल बाँस हरा ॥ ॥ दो० ॥ सत्र संसार औ पृथिवी, आये सातो दीप। एक दीप नहिं आतिम, सिंहल दीप समीप॥ गन्धर्वसेन सुगन्ध नरेशू। सो राजा वह ताकर देशू ॥ लंका सुना जो रावण राजू। तेहु जाहि बर ताकर साजू ॥ छप्पन कोटकटकै दलसाजा। सबै छत्रपति औ गढ़राजा ॥ सोरह सहसै घोड़ घुड़शारों। श्यार्मकरणजसत्रांक तुपारा ॥ सात सहसै हस्ती सिंहली। ईम कैलासं ऐरापति बली ॥ अश्वपतिक शिर मौर कहावे। गजपतीकै अँकुशगर्जै नावे॥ नरपतीकै कहुँ और नरिन्दू। भूपतीक जगे दूसरइन्दू ॥ दो० ऐसो चकैवे राजा, चेहूँखण्ड भू होय । सबै आय शिरनावहीं, सरबर करी न कोय ॥ जोहि दीप नेरे भा जाय। जनु कैलास तीर भा आय ॥ गहन अंबरोंउ लागचहुँपासा। उठी भूमि हतिलागि प्रकासा॥ तरखेरै सबै मलयँगिरि लाये। भइजगछाहिं र्यनि है आये ॥ मिली सुमेर सुहाई छोहां। जेठ जाड़लागै तेहि माहां ॥ वही छाहिं र्यनि है आवै। हरियर सबै प्रकास देखावै ॥ पन्थकै जो पहुँचे सहि घामू। दुख बिसरे सुखहोय विश्रामू ॥ जिन्ह वह पाई छाहिं अनूपों। फिरि न आय सही यहिधूप॥ बराबर १ राजा २ फौज ३ हजार ४-७ अस्तवल ५ घोड़े की जात ६ हाथी ८ बराबर ६ नाम पहाड़ १० नाम हाथी राजा इन्द्र ११ घोड़े सवार १२ हाथी सवार १३ हाथी १४ राजा १५-१६-१७ दुनिया १८ राजा इन्द्र १६ चक्रवर्त्ती २० तमाम दुनिया २१ बराबर २२ नाम पहाड़ २३ गुंजान २४ बाग २५ ज़मीन २६ पेड़ २७ चन्दन २८ रात्रि २६-३१ पहाड़ ३० मुसाफ़िर ३२ आराम ३३ बेमिसाल ३४ ॥

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