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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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१४४ पद्मावत । करिमज्जनं १ तन कीन्ह नहानू । पहिरो चीर गयो छिप भानू २ ॥ रचि पत्रावलै ३ मांग सेंदूरी । भरिमोतिन औ माणिकैं पूरी ॥ चंदन चीर पहिर बहु भांती । मेघ घटा जानहुँ बकें ४ पांती ॥ श्री जो रतन मांग बैठारा । जानहुँ गगनैं ६ टूटिनिशि ७ तारा ॥ तिलक ललाट ८ धरातस दीठा । जनहुँ दुइज पर नखत न बैठा ॥ कानन कुंडल खूँट ९ औ खूँटी १० । जानहुँ परी केंचीची ११ टूटी ॥ दो० पहिर जड़ाउ ठाढ़ भइ, कहि न जाय तस भाव । मानहुँ दरपन गगनैं भा, तो शशि १२ तार देखाव ॥ बांक नयन औ अञ्जन रेखा । खंजनै १४ जानु शरदऋतु देखा ॥ जो जो हेरै १५ फेर चषै १६ मोरी । लरै शरद महँ खंजन जोरी ॥ भौंहैं धनुष धनुष पै हारा । नयन सांध जनु बाएन मारा ॥ करनफूल नासक अतिशोभा । शशि १२ मुख आय सूक जनु लोभा ॥ सुरंग अधर १७ औ लीन्ह तँवोरा । सोहै पान फूल कर जोरा ॥ कुसुम गेंद अस सुरंग कपोलों । तेहि पर अलकैं भुवंगिनैं डोला ॥ तिल कपोल अल पंकज बैठा । वेधा सोई जो वह तिल दीठा ॥ दो० देख शिंगार अनूपै २२ विधि, विरह चला तब भाग । कालकष्ट वह उनवा, सब मोरे जिय लाग ॥ का बरणों अभरणैं २३ औ हारा । शशि पहिरे नखतन की मारा ॥ चीर चार औ चन्दन चोला । हीर हार नग लाग अमोला ॥ तेहिं झांपी रोमावल कारी । नागिनि रूप डंसी हत्यारी ॥ कुचैं २४ कंचुकी २५ श्रीफल उभे । हुलसहिं चहहिं कंत हिय चुभे ॥ उबटन १ सूर्य २ नामदाया ३ बगुल ४ टीका ५ आसमान ६ ७-१३ रात ८ माथा ९ बाली १० करनफूल ११ नाम छोटे नखत १२ चांद १४-१९ ममोला १५ देखना १६ आंख १७ होंठ १८ गाल २० बाल २१ नागिन २२ बेमिसाल २३ ज़ेवर २४ छाती २५ अँगिया २६ ॥

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