पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५६ पद्मावत । भोर होत तब पलहु शरींरू । पाय घुमरहों शीतल नीरू ॥ दो० एकबार भर देहु पियाला, बारबार को मांग । मुहम्मदकिमन पुकारे, ऐसो दांव जेहिखांगै ॥ भयों बिहान उठा रँबि साईं । चहुँदिशि आई नखतं तराईं ॥ सबनिशं सेजमिला शशिसूरू । हारचीर बलियाँ भइ चूरू ॥ सुधनं पान चून भइ चोली । रंगरँगील निरँगै भइ डोली ॥ जागत रैयनि भयो भिनसारा । भइ बेसँभारे सोत वेकरारा ॥ अलकैं तुरंगिनि हिरदयै परी । नारँगैं छुइ नागिन विषभरी ॥ लँरी मुरी हिये हार लपेटे । सुरैसरि जनु कालिन्दी भेंटे ॥ जनुप्रयागैं आयलें बिचमिली । बेनी भइ सो रोमावली ॥ दो० नाभी लोंभेते गये, काशीकुण्डैं कहाव । देवतामरहिंकलंपशिर, आपहिंदोल नलाव ॥ विहँसि जगावर्हि सखीसयानी । सूर उठा उठि पद्मिनिरानी ॥ सुनत सूरै जनु कमल बिकासाँ । मधुकैर आयलीन्हमधुवासा ॥ जनहुँ मातबसैं पानी वरसी । अतिविपभरफूलीजनुअरसी ॥ नयनकमल जानहु दुइखोले । चितवनमृगै सोअतिजनुभूले ॥ तन बेसँभार केश औ चोली । चितअचेतजनु वाली भोली ॥ कमलमांझ जनु केसरै दीठी । यौवन हुत सो गँवाई बैठी ॥ भये शशि गहेगहन अस गहे । बिथरे नखत सेजभर रहे ॥ नशा १ ठण्डापानी २ कमी ३ सूर्य तथा राजा ४-८ सहेली ५ रात ६ चाँद ७ चूड़ी ६ पद्मावत १० बेरौनक ११ रात १२ बेहोश १३ बालकीलटै १४ छाती १५ तथा छातियां १६ पँचलरौ वा सतरलरी १७ छाती १८- गङ्गा जी तथा छाती १६ यमुना तथा छाती के बाल २० नाम तीरथ २१ नाम मुकाम २२ त्रिवेनी २३ लालच २४ मणिकर्णिका कुण्ड २५ शिरकटाना२६ गुनाह २७ सूर्य २८-२६ खिलना ३० भँवर ३१ मस्तीवसी ३२ हिरन ३३ ज़र्दरङ्ग ३४ चाँद ३५ तथा हारके मोती ३६ ॥