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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत। १५७ दो० बेल जो राखी इन्द्रकहँ, पवन बास नहिं देहि। लाग्यो आय भँवर तेहि, कली बेध रस लेहि॥ हँसि हँसि पूँछै सखी सरेखी¹। जनहु कुसुंद² चन्दनमुखदेखी³॥ रानी तुम ऐसी सुकुमारा। बास फूल तन जीव तुम्हारा॥ सहिनहिंसकोहृदय पर हारू। कैसे सहो कन्तकर भारू॥ बदनकमलविक्सते⁴ दिनराती। सो कुंभलातकहो केहिमांती॥ अधर⁵ कमल जो सहत न पानू। कैसे सहा लाग मुख भानू⁶॥ लंक⁷ जो पैंग देत मुरझाई। कैसे रही जो राव न राँई⁸॥ चन्दन चोप⁹ पवन अस पीव। भयो चित्रसम¹⁰ कसभा जीव॥ दो० सब अरगजे¹¹ मरगजे¹² भयो, लोचन¹³बिंबे¹⁴ सरोजेँ¹⁵। सत्य कहो पद्मावत, सखी परीं सब खोज ॥ कहौं सखी आपन सतभाऊ। हों जो कहत कस रावनराऊ¹⁶॥ कांपों भँवर पहुंपैं¹⁷ पर देखे। जनुशशि¹⁸गहन तैसिमोहिलेखे॥ आज मर्म¹९ मैं जाना सोई। जस पियार पिय और न कोई॥ डर तवलग अह मिलानपीव। भानुँ²⁰ की दृष्टि²¹ छूटा सीवै²²॥ जतखन भानुलिन्हपरकासूँ²³। कमलकलीमनकीन्ह बिकासूँ²⁴॥ हिये²⁵ छोहँ²⁶ उपजों²⁷ ओसीवें²⁸। पिय न रिसाय लेव परजीव॥ हतजोअपारविरहदुख दूखा। जनहुअगस्त्यउदधि²९जलसूखा॥ दो० हमहुँ रंग बहु जानव, लहरें जेंत समुंद। पिय लैगये चतुराई, सक्यों न एको बुन्दे ॥ होशियार १ कोकाबेली २ छाती ३ मुँह ४ खिलना ५ होंठ ६ सूर्य तथा राजा ७ कमर ८ तथा राजकी सुहबत ६ तसवीर १० खुशबू ११ दलमल १२ आँख १३ कुन्दरू की तरह लाल १४ कमल १५ तथा औरत मर्द की सुहवत १६ फूल १७ चाँद १८ भेद १९ सूर्य २० निगाह २१ जाड़ा २२ रोशनी २३ खिलना २४ दिल २५ मेहरबानी २६ पैदा २७ खिदमत २८ समुद्र २६ दांव ३० ॥