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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 159

१५८ पद्मावत । करि शिंगार तापन कहँ जाऊँ । ओही देखों ठांवहिं ठाऊं ॥ जो जियमहँ तो वही पियारा । तनमहँ सोइ न होय निरारों ॥ नयनहि महँ तो वही समाना । देखों जहां न देखों आना ॥ आपहिं रस आपहि पै लेई । अधरैं सहस लागे रस देई ॥ हियौ थार कुच कंचन लाडू । अगमन भेंट दीन्ह कै चाडू ॥ हुलसी लङ्क लई सो लसी । रावेनें रहस कसौटी कसी ॥ यौबन सबै मिला वह जाई । हौंरी बिच हुत गयो हेराई ॥ दो० जस कुछ दीजे धरने कहँ, आपन लेह सँभार । तस शिंगार सबलीन्हेसि, कीन्हेसि मोहिं ठठार ॥ एरी छबीली तुहिं छब लागी । नेत्र गुलाल कंत सँग जागी ॥ चम्प सुदरशन अस भा सोई । सोन जर्द जस केंसरै होई ॥ बैठि सँवर कुचै नारँग बारी । लागी नखें अधरैं रंगधारी ॥ अधरैं अधरसों भीज तंबोरी । अलकावलि सुरसुरगइ मोरी ॥ राय सुँनी तुम्ह औ रतमूँहीं । अलि मुखलाग भईफुलचुँहीँ ॥ जैसे शिंगार हार सों मिली । मालति ऐसी सदारहिखिली ॥ पुनि शिंगाररस किरौं नेवारी । कदम सेवति पियहिपियारी ॥ दो० गोंद कलीसम बिकैंसी, ऋतु बसन्त औ फाग । फूलहु फरहु सदा सुख, औ सुख सुफल सुहाग ॥ कहि यह बात सखी उठ धाई । चम्पावतैं कहँ आय सुनाई ॥ आज निरँगैं पद्मावत बारी । जीव न जाने पवनअधारी ॥ जगह १ अलग २ होंठ ३ छाती ४ सोने के लड्डुवासी छातियां ५ पहिले ६ पियार ७ खुश होना ८ कमर ६ तथा राजा १० धरोहर ११ आँख १२ खाविंद १३ पीली १४ छाती १५ लड़की १६ नाखून लगनेसे रंगजाता रहा १७ होठपर पानकी लाली १८ बाल १६ लाल २० सुर्ख मुँह २१ भँवर २२ नाम चिंड़िया २३ बराबर २४-२५ खिलना २६ मायपद्मावत २७ बेरंग २८ ॥