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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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और कुंड बहु ठावहिं ठाऊँ। सर्व तीरथ औ तेहिके नाऊँ ॥ मठ मण्डप चहुँ पास सँवारे। तपी १ जपी २ सब आसन मारे ॥ कोई सुऋषीश्वर कोई संन्यासी। कोई रामयती ६ कोई बिेशवासी ॥ कोई ब्रह्मचर्य पंथ ८ लागे। कोई सो दिगम्बर अचिरैं नागे ॥ कोई सुमहेरवरे योगी ११ यती १२ । कोई एक परखै देवी सती ॥ कोई सरस्वती १७ संत कोई योगी १८। कोई निराशैं पंथ बैठि बियोगी १९॥ दो० सेवरो खेवनों वानप्रस्थी, २१ शिष साधक २२ अवधूत २३। आसन मारे बैठि सब, पांच आत्मा भूत ॥ मानसरोवरै वरणौं २५ काहा। भरा समुद्र अस अति अवगाहा ॥ जल मोती अस निरमले तासू। अमृतबरन कपूरसुबासू ॥ लंकदीपकी शिला अनीई। बांधा सरवर घाट बनाई ॥ खण्ड खण्ड सीढ़ी भुइँ घेरे। उतरहिं चढ़हिं लोग चहुँ फेरे॥ फूला कमल रहा है रातो ३०। सहसैं सहस पखिन ३२ के छाता॥ उलटहिं सीप मोति उतराहीं। चुनहिं हंस औ केलि कराहीं ॥ खनि पतार पानी तहिं काढ़ा। क्षीरसमुद्र निकस तहँ ठाढ़ा ॥ दो० ऊपर पाल चहूँदिशैं, अमृत फल सब रूख। देखि रूप सरवरै का, गई पियास औ भूख ॥ पानि भरी आवहिं पनिहारीं। रूपस्वरूप पद्मिनी नारीं ॥ पद्मगन्ध तिन अङ्ग बसाहीं। भँवर लागि तिन संग फिराहीं ॥ लंकसिंहिनीसारंग ३८ नयनी ३९। हंसगामिनी ४० कोकिलबयनी ४२॥ जगह १-२ तप करनेवाले ३ जप करनेवाले ४ क़िस्म योगियोंकी ५-६ ७-८-१०-११ राह ६ क़िस्म योगी १२-१३-१४-१५-१६-१७-१८-१९ २०-२१-२२-२३ नाम तालाब २४ तारीफ़ २५ बहुत गहिरा २६ साफ़ २७ रंग २८ खुशबू २६ तालाब ३० सुर्ख ३१ हज़ार ३२ चिड़ियाँ ३३ चारोंतरफ़ ३४ नामतालाब ३५ कमलकी खुशबू ३६ बदन ३७ कमर शेरनी की तरह ३८ हिरण ३६ आँख ४० चाल ४१ आवाज़ ४२ ॥