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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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१६ पद्मावत। आवहिंझुण्डसोपांतिहिपांती। गवनें१सुहायसुभांतिहि२ भांती॥ कनक३कलश४मुखचन्ददिपाहीं। रहसकेलिसे आवहिंजाहीं॥ जासों वै हेरें७ चखें नारी। बांके नयन जनुहनहिं कटारी॥ केशॆं मेघवर शिर ता पाहीं। चमकहिंदशनैं१० वीजुं११ कीनाईं॥ दो० माथे कनकॆं१२ गागरी, आवहिं रूप अनूपैं१३। जेहिकी ये पनिहारी, ती रानी केहि रूप॥ तालतलावा बरणि१४न जाहीं। सूझै वारपार कुछ नाहीं॥ फूलीकुमुदि१५केति१६ उजियारो।मानहुँ उये गगनैं महँ तारे॥ उतरहिं मेघ चढ़हिं लै पानी। चमकहिं मच्छवीर्जु कीवानी॥ तैरहिंपंखी१८सुसंगहि संगा। श्वेतें पीतैं२१ राती२२ बहु रंगा॥ चकई चकवा केलि कराहीं। निशौँ विछोहदिनहिंमिलिजाहीं॥ करलहिंसारस करहिं हुलासा। जीवन मरनसुएकहिं पासा॥ कम्पासो२५ डहनकें बकें लेदी२८। रही अपूरमीन२९ जलभेदी॥ दो० नगअमोल तेहितालहि, दिनहिंवरहिं जसदीप। जो मरजिया होयतेहि, सो पावै वह सीप॥ आसपास बहु अमृत बौरी। फरीं अपूर होय रखवारी॥ नारँग नींबूर तुरंज जँभीरा। औ बदाम बहु बेद अँजीरा॥ गुलंगुल तुरंज सदाफर फरे। नारँग अति रौंती रस भरे॥ किसमिस सेव फरे नौ बाता। दाड़िमैं दाख देखि मनराताँ॥ लागि सुहाई हरफारेवरी। उनयरहीं केला की घौरी॥ चलना १ तरह २ सोना ३ घड़ा ४ चमकना ५ खुशी से उछलती कूदती ६ देखना ७ आँख ८-६ बाल १० दाँत ११ त्रिजुली १२-१६ सोना १३ बेमिसाल १४ तारीफ़करना १५ कोकांवली १६ नामनखत १७ आसमान १८ चिड़िया २० सफ़ेद २१ पीली २२ लाल २३ रात्रि २४ नामजानवरपरिन्द मछली पकड़ कर खाजानेवाले २५-२६-२७-२८मछली २६ बागीचा ३०लाल ३१-३३ अनार ३२॥