पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 18, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। १७ फरीतूत कमरख औ ब्योजौँ । राय करौंदा बेर चिरौंजी ॥ सुगन्धराव छुहारा दीठे १। और खजहजाँ २ खाटे मीठे ॥ दो० पानि देहिं खण्डवॉनी ३, कुवहिं खांड़ नहिं भेल । लागी घरी रँहँटकी, सींचहिं अमृत बेल ॥ पुनि फुलवारि लाग चहुँपासा । बृक्षे ४ बेदहिचन्दन झइबासा ॥ बहुत फूल फूली घन बेली । क्यौँड़ा चम्पा गोंद ६ चमेली ॥ सुरंग गुलाल क़दम औ गूजा । सुगंध बकोरी गन्धब पूजा ॥ जाहीजूही बर्गचन लावा । पहुपं ५ सुदरसन लागसुहावा ॥ नागेसर सदबँर्ग ७ हवारी । औ शिंगारहार फुलवारी ॥ सुमन जर्द बहु खिली सेवती । रूपमंजरी और मालती ॥ मोलसिरी बेली औ करना । सबै फूल फूले बहु बरना ॥ दो० तेहि शिर फूल चढ़हिं वै, जेहि माथे मन भाग । आह्नेह सदा सुगन्धबहै, जनु बसंत औ फाग ॥ सिंहलनगर दीख पुनि बसा । धनिराजा अस जाकर दसा ॥ ऊँची पँवरी ८ ऊँच उड़ासाँ ९ । जनु कैलास इन्द्रकर बासा ॥ राउ रंक सब घर घर सुखी । जो देखे सो हँसता मुखी ॥ रचि रचि साजे चन्दन चूरा । मोती अगरे १० मैद करपूरा ॥ सब चौपारहिं चन्दन खँभा । तहिं राजा तब बैठो सभा ॥ जनु सभा देवतहिं की जुरी । परी दृष्टि ११ इन्द्रासन पूरी ॥ सबै गुणी औ पण्डित ज्ञाता । संस्कृते १२ सबके मुख राताँ १३॥ दो० अलखहिं १४ पन्थ सँवारैं, जनु शिवलोक अनूपं १५ । घरघरनारिपद्मिनीमोहहिं, सबअपसरनैं १६ केरुप १७॥ नाम मेवा १ देखना २ खजूर ३ माली ४ पेड़ ५ फूल ६ गेंदा ७ रंगबरंग ८ जीना ९ महल १० केसर ११ निगाह १२ संस्कृत जबानके सब बोलनेवाले १३ लाल १४ ईश्वरकोराह १५ बेमिसाल १६ स्वर्गकी औरतें १७ ॥