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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 174

पद्मावत। हारिलै भई पंथ मैं सेवा। अब तुहि पठवों कौन प... धौरी पांडुकै कहि पियठाऊँ। जो चितरोखै न दूसरना... जाय बिवाही पिय कंठलुवा। करै मिलाव सोई गौरवा ॥ कोकिलै भई पुकारत रही। महरं पुकार लीन्ह लै दही ॥ पेड़तिलोरी औ जलहंसो। हिरदैं बैठि बिरहलगनंसा ॥ दो० जेहि पंखी के नेर होय, कहै बिरहकी बात। सोई पंख जर तरवरै, जाय होय नहिं पात ॥ कुहुककुहुक जस कोयल रोई। रक्त आंश घुँघची बन बोई ॥ भइकर मुखी नयन तन रँती। को सिराव बिरहाडख तौती ॥ जहँ जहँ ठाढ़ होय बनवासी। तहँतहँहोइघुँघचिन्हकीरासी ॥ बूँद बूँद महँ जानौ जीव। गूँजागूँज करहिं पिय पीव ॥ तेहि दुखभई पलास निपाती। लोहू बूड़ उठी होय रँती ॥ राती बिम्बै भये तेहि लोहूँ। परवर पाक फटे हिये गोहूँ ॥ देखों जहां सोइ है राता। जहँ सो रतन कहै को बाता ॥ दो० नापावर्स वह देशरा, नहिं हेवन्त न बसन्त। ना कोकिल न पपीहरा, जेहिसुनिआवेंकन्त ॥ फिरिफिरि रोयकोई नहिंडोला। आधीरात बिहंगमं बोला ॥ तुइफिरफिरदाँहे सब पांखी। केहिगुन रैयनि न लावेसिआंखी॥ नागमती केहि कारनै रोई। कासों कहूँ जो कन्त बिछोई ॥ मन चित हिये न उतरै भोरे। नयन कजल चपै रहे न मोरे ॥ कोइनजाय तेहि सिंहलदीपा। जेहिसेवाव कह नयनासीपा ॥

  • नामचिड़िया १-३-४-५ जानवर परिन्द २ गले लगाया ६ तथा मर्द ७ नामचिड़ियां ८-६-१०-११-२० दिल १२ पेड़ १३ लालआँख १४ जलीहुई १५ लाल १६ कुंदरू १७ छाती १८ बरसात १६ जलाना२१ रात २२. वास्ते २३ अलग २४ आँख २५ ॥