पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 173, कुल 318 में से
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१७२ पद्मावत । मुहम्मद सती सराही, जरै जो अस पिय लाग । तपै लाग अब जेठ असाढ़ी । भइमोकहँ यहिछाजनें गाढ़ी ॥ तृण तृणैं बर भा झूरों खरी । भा वर्षा दुख आगर जरी ॥ बंध नाहिं औ खण्ड न कोई । नागें न आव कहौं कहि रोई ॥ सांठे नांठलग बात को पूँछा । बिनजिय फिरै मूँजतन हूँछा ॥ भई हुँहेली टेक बहूनी । थांभ नाहिं उठ सके न थूनी ॥ बरषहिं मेह चुवहिं नयनाहा । छपर छपर होई बिन नाहा ॥ कोरो कहां ठाठ नव साजा । तुमबिनकंतनछाजन छाजा ॥ दो० अबहूँ दृष्टि मयाँ कर, नाथ निठुर घरआव । मँदिर उजाड़ होत है, नवके आय बसाव ॥ रोय गँवाई बारह मासा । संहसे सहसदुखइकइकश्वासा ॥ तिल तिल बरषबरषपर जाई । पहरपहर युग युगन संरोई ॥ सौंहे आव पिय रूप मुरारी । जासों पाव सुहाग सुनारी ॥ सांझ भई झुरझुरपंथै हेरी । कौन सो घरी करी पिय फेरी ॥ दहि कुइला भइकन्तसनेहा । तोला मांस रहा नहिं देहा ॥ रक्त न रहा बिरह तन गिरा । रती रती है नयनहिं ढुग ॥ पांय लगी जोरै धनै हाथा । जोरा नेह जोराये नाथा ॥ दो० बरस दिवसैं धनरोय के, हारपरी चित झंख । मानुष घर घर बूझिके, पूँछी निसरी पंखि ॥ भई पुंछाैर लीन्ह वन बासू । बैरिनसौत दीन्ह चिलवासूं ॥ हौं खोरि वान बिरहतन लागा । जो अबहूँ आवै घर कागा ॥ छावना १ तिनका के बराबर २ पत्ती ३ रुपया पास नहीं ४ दुबली ५ बेसहारा ६ खाविन्द ७ छावनी ८ निगाह ९ मेहरबानी १० हज़ार ११ मालूम होना १२ सामने १३ राह १४ जलना १५ नागमती १६ दिन १७ जानवरपरिरन्द १८ मोर १९ चिल्लाना २० तिनका २१ ॥