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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 182

राजसभा पुनि उठी सँवारी । अस बिनती राखी पत भारी ॥ भाइन मांझ होय जन फूटी । घरके भेद लंक अस टूटी ॥ बिरवा लाय न सूखने दीजै । पावै पान दृष्टि सो कीजै ॥ अस राखी तुम दीपक लेसी । पै न रहै पाहुन परदेसी ॥ जाकर राज जहां चलि आवा । वही देश पै ताकहँ भावा ॥ हम दोउ नयन घाल के रखहिं । ऐसो भाख यहि जीभ न भाखहिं ॥ दिवस देहुँ सकुशल सिधावहिं । दीर्घआयु होय पुनि आवहिं ॥ दो० सबहिं विचार परा अस, भा गवने कर साज । सिद्ध गणेश मनावहिं, विधि पूरवे मन काज ॥ बिनयै करै पद्मावत बारी । हों पिय कमलसों गोद नेवारी ॥ मोहिं अस कहां सो मालति बेली । कदम सेवती चम्प चँबेली ॥ औ श्रृंगार हार जस तागा । पुहुप कली अस हिरदयँ लागा ॥ हों सुबसन्त करों नित पूजा । कुसुम गुलाल सुदरशन गूजा ॥ बकचन बिनवों रोस बिमोही । सुनि बकाव तज जाही जूही ॥ नागेसर जो मन है तोरी । पूज न सके बोलसर मोरी ॥ हों सदवर्ग लीन्ह मैं शरना । आगे कर जो कन्त तुहिकरना ॥ दो० केतेनारि समुझावै, भँवर न काटै बेध । कहै मरौं पै चित्तोर, यज्ञ करों अश्वमेध ॥ गवन चार पद्मावत सुना । उठा धसक जिव औ शिर धुना ॥ गहवर आय नयन भर आंसू । छांड़व यहि सिंहल कैलाशु ॥ छांड़यो नैहर चल्यों बिछोही । यहरे दिवसँ होहूँ तहँ रोई ॥ छांड़यों आपन सखी सहेली । दूरगवन तज चल्यों अकेली ॥

  • निगाह १ दिन क़रार दो २ बड़ी उमर हो ३ ईश्वर ४ अर्ज़ करना ५ फूल ६ छाती ७ तारीफ़ सुनि गुस्सा नहीं आता ८ तथा नागमती ६ तथा राजा १० अलग ११ दिन १२ ॥