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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 189, कुल 318 में से

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पृष्ठ 189

१८८ पद्मावत । सोई पुरुष द्रव्य जो सैंतैं । द्रव्यहुतें सुनि बातैं ऐतैं ॥ द्रव्य ते गर्व्व करै जो चाहा । द्रव्यते धर्ती स्वर्ग निवाहा ॥ द्रव्य ते हाथ आव कैलासू । द्रव्यते अपसर छांड़ न पासू ॥ द्रव्यते निरगुन हो गुनवत्ता । द्रव्य ते कुब्जरूपे रूपवन्ता ॥ द्रव्य रहै भुइँ दिपै लिलारौँ । अस मन द्रव्य हिये को पारा ॥ द्रव्य ते धर्म कर्म औ राजा । द्रव्यते सुद्धिबुद्धि बलकाजा ॥ दो० कहा समुद्र रे लोभी, बड़ी द्रव्य नहिं झांप । भयो न काहू आपन, मूँद पिटौरी सांप ॥ आधे समुद्र आय सो नाहीं । उठी वायु आंधी उपराहीं ॥ लहरें उठीं समुद्र उलथानोँ । भूला पंथै स्वर्ग नियराना ॥ अदिन आय जो पहुँचे काहू । पहनँ उड़ाय वहैं सो वाऊ ॥ बोहित भई लंकादिश ताकी । मारगें छांड़ कुमारग हांकी ॥ जो लै भार निवाहन पारों । सो का गर्व्व करै कन्धारों ॥ द्रव्य भार सँग काहि न ऊठा । जैं सैंतौ ताही सों रूठा ॥ गहि पखानै लै पंख न ऊड़ा । मोर मोरजें कीन्ह सो वूड़ा ॥ दो० द्रव्य जो जानहि अपना, भूलाहिं गर्व में नाहिं । जेरि उठाय न लैसकहिं, बूड़ चलहिं जलमाहिं ॥ केवर्ट एक बिभीषण केरा । आव मच्छकर करत अहेरौँ ॥ लंकाकर अति राखस कारा । आवै चला होय अँधियारा ॥ पांच सूड़ दश बाहीं ताही । धड़भाश्याम लंक जवदौही ॥ धुवां उठै मुख श्वाससँघातां । निकसै आग कहै जो बाता ॥ गरूर १ बदसूरत २ माथा ३ उलटना ४ राह ५ बुरेदिन ६ पत्थर ७-१५ नाव ८ लंका की तरफ़ ६ राह १० जयतक होसका ११ गरूर १२ मल्लाह १३ जोड़ना १४ मल्लाह १६ शिकार १७ काला १८ जलना १६ श्वासके साथ२०॥

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