पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। १८६ फेकरे मूँड़ चँवर जनु लाये। निकस दांत मुख बाहेर आये॥ देह रीछकी रीछ डेराई। देखत दृष्टि धाय जनु खाई॥ रातेनयन निडर जो आवा। देख भयावन सब डरखावा॥ दो० धर्ती पाँयँ स्वर्ग शिर, जानु सहस्राबाहु। चांद सूर्य औ नखतम्हँ, अस देखेजनुराहु॥ वोहितँ वही न मानहि खेवा। राक्षंस देखि हँसा जनु देवा॥ बहुते दिनहिबारै भइ दूजी। अजगरकेर आय मुखपूंजी॥ यहि पद्मिनी विभीषण पावा। जानहु आज अयोध्याछावा॥ जानहु रावन पाई सीता। लंका बसी राम रन जीता॥ मच्छ देख जैसें बकँ आवा। टोयटोय सुइँ पांव उठावा॥ आय नेर होय कीन्ह जोहारू। पूँछा क्षेम कुशल व्योहारू॥ जो विश्वासघात का देवा। बड़ विश्वास करैकी सेवा॥ दो० कहां मीत तुम भूलेहू, औ जायहु केहि घाट। हों तुम्हार अस सेवक, लाय देउँ तुहिं बाँटे॥ गाँढ़ परे जिव बावर होई। जो भल बात कहै भल सोई॥ राजैं राक्षस नेर बोलावा। आगे कीन्ह पन्थ जनु पावा॥ बहुवंसोवै राक्षसकहँ बोला। पैगटेकें भूमि सब डोला॥ तू खेवकैं खेवक उपराहीं। वोहितँ तीरलाव गहिबाहीं॥ तुहितें तीर घाट जो पाऊँ। नौगिरही तोडर पहिराऊँ॥ कुण्डल श्रवणँ देउँ नग लाई। महराकी सौंपों महराई॥ तस राक्षस तोर पूरों आसा। राक्षसाइन की रहै न बासा॥ निगाह १ लाल आंख २ नाम राजा जिसके हज़ार हाथ थे ३ नाव ४ खुशहुआ ५ पेट भरा ६ बगुला ७ खैरियत ८ दग़ाबाज़ ६ यक़ीन १० राह ११—१३ दुःख १२ ख़ुशी १४ खड़ाहूआ १५ ज़मीन १६। मल्लाह १७ नाव १८ नाम ज़ेवर १६ कान २० ॥