भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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१६४ पद्मावत । सेंदुर जरै आग जनु लाई । शिरकी आग सँभार न जाई ॥ छूट मांग सब मोति परोई । बारहिंवार गिरहिं जनु रोई ॥ टूटहिं मोति बिछोहैं के भरे । श्रावण बूँद गिरहिं जनु झरे ॥ फेर फेर कर यौबनै करा । जानहु कनक आगिन महँ जरा ॥ अगिन मांग पै देइ न कोई । पाहुनै पवनैपान सम होई ॥ खीनलंक टूटी दुख भरी । बिनरावनैं केहिवरं होयखरी ॥ दो० रोवत पंख विमोही, जनु कोकिला अरम्भं । जाकर कनक लुटासो, विछुड़ी प्रीतम खम्भ ॥ लक्ष्मी लाग बुझावै जीव । नामर बहिन मिलाहि तोरपीव ॥ पियो पानि होव पवन अधारी । जस हौं तुह समुद्र की वारी ॥ मैं तोंहि लाग लेत पटबाट् । खोजव पितै जहांगलघाटू ॥ हौं जेहि मिलौं ताहिं बड़भागू । राज पाट औ देउँ सुहागू ॥ कहि बुझाय के मंदिर सिधारी । भइज्योनार न जेवै नारी ॥ जेहिरे कन्तकर होय बिछोवौ । कातेहि नींद भूख सुखसोवा ॥ जीव हमार पीव लें आहा । दरशन देव लेव चितचाहा ॥ दो० लक्ष्मी जाय समुद्र पहँ, ये बातैं सब चाल । कहा समुद्र अहे घटमोरे, आन मिलावों काल ॥ राजा जाय तहां बहि लागा । जहां न कोइ संदेशी कागा ॥ तहां एक परबंत हा धूँगा । जहवां सब कपूर औ मूँगा ॥ तहँ चढ़ हेरौं कोइ न साथा । दर्व्यसमेटकुछ लाग न हाथा ॥ रहा जो रावण केर बसेरौ । गोहराये कोइ मिले न हेरा ॥ विरह १ जवानी २ सोना ३ महिमान ४ हवा पानी देते हैं ५ पतली कमर ६ तथा राजा रतनसेन ७ ताक़त ८ मोहजाना ९ बेक़रार १० सोना ११ लड़की १२ याप १३ पद्मावत १४ जुदाई १५ ऊँचा पहाड़ १६ देखना १७ मकान १८ ॥