पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ पद्मावत ॥ स्तुतिखण्ड ॥ चौपाई ॥ सुमिरौं आदि एक करतारू। जें जिव दीन्ह कीन्ह संसारू॥ कीन्हेसि प्रथमँ ज्योति परकाशू। कीन्हेसि तिनहिं प्रीति कैलांशू ॥ कीन्हेसि अगिनि पवन जल खेहाँ। कीन्हेसि बहुतै रंग औरेहाँ ॥ कीन्हेसि धरती स्वर्ग पतारू। कीन्हेसि वरणं वरणैं अवतारेँ॥ कीन्हेसि दिन दिनेशै शशि राती। कीन्हेसि नखत तरायनैं पाती॥ कीन्हेसि धूप सेवै औ छांहा। कीन्हेसि मेघ बीजँ तेहि मांहा॥ कीन्हेसि सँसै मैही ब्रह्मांडौ। कीन्हेसि भवन चौदहो खंडौ ॥ दो० कीन्ह सबै अस जाकर, दूसर छाजन काहि। पहिले ताकर नाउँ लै, कथा करों अवगाहि ॥ कीन्हेसि सात समंदर पारा। कीन्हेसि मेरु खखंड पहारा॥ कीन्हेसि नदी नार औ झरना। कीन्हेसि मगर मच्छ बहु बरनी ॥ कीन्हेसि सीप मोति तहँ भरे। कीन्हेसि बहुते नग निरमरे ॥ याद करना १ सब से पहिले २ परमेश्वर ३ पहिले ४ उजियारा ५ नाम पहाड़ तथा स्वर्गलोक ६ आग ७ हवा ८ माटी ६ चित्रकारी १० ज़मीन ११-२२ आसमान १२-२३ रंगबरंग १३ पैदायश १४ सूर्य १५ चांद १६ छोटे नखत १७ जाड़ा १८ बादल १६ बिजुली २० सात २१ सातपरदा आसमान सातपरदा ज़मीन २४ शुरू २५ बीहड़ २६ राह-मुश्किल २७ क़िस्म २८ जवाहर साफ़ २६ ॥